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योर मनीः रिटायरमेंट के लिए एनपीएस में बढ़ा रुझान

प्रकाशित Wed, 17, 2019 पर 13:04  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

आम जनता के लिए शुरू होने के 10 साल बाद तक एनपीएस में आज तक निवेशकों को काफी दुविधा है, टैक्स से जुडे कई प्रावधानों को आसान करने के बावजूद ये इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट निवेशकों की मन पसंद लिस्ट में आज तक नही जगह बना पाया है। लेकिन इन बातों को दरकिनार करते हुए आज हम आपको बताना चाहते हैं के एनपीएस में रिटर्न को लेकर कुछ अच्छी खबर आनी शुरू हो गई है। एनपीएस में बढ रहे रिटर्न का फायदा आप कैसे उठा सकते हैं, आज शो की चर्चा हम इसी से करने वाले हैं।


वहीं रिटायरमेंट के लिए एनपीएस में रुझान बढ़ा है। अब सरकारी सरकारी कर्मचारियों के अलावा बाकी लोगों का निवेश बढ़ा है। 50000 अतिरिक्त टैक्स छूट से रुझान बढ़ा। रिटायरमेंट के लिए कॉर्पस जुटाने में मदद मिलेगी। एनपीएस में अच्छे रिटर्न और कोई खर्च नहीं होता है। पेंशन प्लान रिटायमेंट सेविंग के लिए सही विकल्प होता है। लंबी अवधि तक निवेश बनाए रखने का मॉडल बनाना चाहिए। मैच्योरिटी पर 40 फीसदी रकम की एन्युटी खरीदना अनिवार्य है। मैच्योरिटी पर 60 फीसदी रकम निकालने का प्रावधान है। जबकि ये 60 फीसदी रकम पूरी तरह टैक्स फ्री है। टैक्स को लेकर उलझन खत्म हुई है।


एनपीएस में कई विकल्प भी उपलब्ध हैं जैसे एक्टिव विकल्प के तहत सब्सक्राइबर खुद फंड चुनते हैं। वहीं ऑटो विकल्प में उम्र के मुताबिक इक्विटी-डेट में निवेश होता है। एक्टिव विकल्प में इक्विटी निवेश की अधिक्तम सीमा 75 फीसदी है।


सवालः डीमैट खाता है, एसआईपी करें या एनपीएस में निवेश करें


सामंत सिक्का का जवाबः यदि एनपीएस और एमएफ में तुलना की जाये तो एनपीएस में लंबी अवधि के लिए प्रतिबद्धता होती है, एनपीएस में अतिरिक्त टैक्स बचत होती है। एनपीएस में इक्विटी में एक्सपोजर कम होने से जोखिम कम होता है। वहीं मैच्योरिटी पर 40 फीसदी रकम की एन्युटी खरीदना जरूरी है। एनपीएस में फंड मैनेजमेंट का खर्च कम होता है। इक्विटी फंड में एक्जिट लोड ड्यूरेशन कम होता है। एक्जिट लोड ड्यूरेशन के बाद रकम निकासी पर कोई सीमा नहीं है। इक्विटी में ज्यादा रिस्क, रिटर्न भी ज्यादा है।