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Personal Loan लेना चाहते हैं? पहले समझ लीजिए खर्चे का हिसाब

क्या आपको पता है कि आपकी जरूरतों के लिए काम आने वाले पर्सनल लोन पर आपको पूरा कितना खर्च पड़ेगा?
अपडेटेड Jul 02, 2019 पर 10:17  |  स्रोत : Moneycontrol.com

पिछले कुछ सालों में लोन प्रॉडक्ट्स के डिजिटलीकरण होने की वजह से Personal Loan की पॉपुलैरिटी में काफी तेजी आई है। अब बैंक और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज भी पर्सनल लोन प्रोवाइड कराने में हिचकिचाती नहीं।


अलग-अलग जरूरतों के लिए अब कई तरह के पर्सनल लोन आने लगे हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि आपकी जरूरतों के लिए काम आने वाले पर्सनल लोन पर आपको पूरा कितना खर्च पड़ेगा?


पर्सनल लोन पर कई तरह के फीस और चार्जेज लगते हैं। वहीं, अलग-अलग बैंकों और NBFCs में पर्सनल लोन पर अलग-अलग चार्ज लग सकते हैं।


तो आइए जानिए कि एक पर्सनल लोन लेने पर कितना खर्च आता है-


इंटरेस्ट चार्ज


पर्सनल लोन पर इंटरेस्ट रेट 10.99 फीसदी से लेकर 24 फीसदी तक लग सकता है। नॉल-सैलरीड बॉरोअर्स के लिए अपर लिमिट थोड़ी ज्यादा हो सकती है। इसके अलावा लोन प्रोवाइडर्स कस्टमर के क्रेडिट स्कोर और संस्थान से उसके संबंध और उसकी आर्थिक स्थिरता को देखकर भी इंटरेस्ट रेट तय करते हैं।


GST


फिलहाल नियम के मुताबिक, लोन से जुड़ी सर्विसेज पर 18 फीसदी जीएसटी लगता है। इन सर्विसेज के तहत प्रोसेसिंग फीस, प्रीपेमेंट और पार्ट-पेमेंट चार्जेज, रीपेमेंट मोड स्वैप चार्जेज, कैंसिलेशन चार्जेज, मिस्ड रिपेमेंट चार्जेज, डुप्लीकेट स्टेटमेंट इशुएंस चार्जेज वगैरह आते हैं। हालांकि, लोन पर लगने वाले इंटरेस्ट रेट पर जीएसटी नहीं लगता।


प्रोसेसिंग फीस


लोन की प्रोसेसिंग फीस लोन प्रोवाइडर पर निर्भर करती है। प्रोसेसिंग फीस लोन अमाउंट प्लस 18 फीसदी जीएसटी के 0.5 से लेकर 3 फीसदी तक लग सकता है। बता दें कि प्रोसेसिंग फीस नॉन-रिफंडेबल फीस होती है, जो किसी केस में आपका लोन कैंसल होने के बाद भी बैंक की जेब में ही जाती है। कुछ बैंक ऐसे भी हैं जो कुछ एलिजिबल कस्टमर्स को प्रोसेसिंग फीस पर पूरी तरह से छूट दे देते हैं।


प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर चार्जेज


अगर आप अपना लोन टेन्योर से पहले चुकाना चाहते हैं तो इसके लिए आपको फोरक्लोजर चार्ज देना पड़ता है। बैंक नहीं चाहते कि आपका लोन टेन्योर कम हो जाए क्योंकि इससे उनको इंटरेस्ट रेट का नुकसान होता है। इसलिए कुछ बैंक लोन देते वक्त ही लोन टेन्योर पर 12 महीने का लॉक-इन पीरियड तय कर देते हैं। वहीं, लॉक-इन पीरियड खत्म होने के बाद प्रीपेमेंट चार्ज आउटस्टैंडिंग बैलेंस प्लस 18 फीसदी जीएसटी का 5 फीसदी तक लग सकता है।


फोरक्लोजर चार्ज इस बात पर निर्भर करता है कि आपका लोन टेन्योर खत्म होने में कितना वक्त है।


रिपेमेंट मोड स्वैपिंग चार्ज


अगर आप अपने लोन का रिपेमेंट मोड बदलवाना चाहते हैं तो बैंक उसपर भी चार्ज लेते हैं। लोन टेन्योर के दौरान लोन प्रोवाइडर्स हर रिपेमेंट मोड स्वैप पर 500 रुपए प्लस 18 फीसदी जीएसटी का चार्ज ले सकते हैं।


लोन कैंसिलेशन चार्ज


अगर आप लोन के अप्रूवल या डिस्बर्सल के बाद इसे कैंसल कराना चाहते हैं तो इसके लिए आपको कैंसिलेशन चार्ज देना पड़ेगा। कुछ बैंक 3,000 रुपए प्लस 18 फीसदी जीएसटी का फ्लैट रेट रखते हैं। वहीं कुछ बैंक लोन डिस्बर्सल और कैंसिलेशन के दौरान लगे इंटरेस्ट पेमेंट को ही चार्ज करते हैं और प्रोसेसिंग फीस भी वापस नहीं करते।


डुप्लीकेट डॉक्यूमेंटेशन चार्ज


बैंक लोन से जुड़े डॉक्यूमेंट्स जैसे- स्टेटमेंट्स, amorization index, NOCs और Credit Information Companies को रीइशू करने के लिए 50 रुपए से 500 रुपए तक प्लस 18 फीसदी जीएसटी लेते हैं।