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10 साल के आंकड़े बताते हैं कि जुलाई में होती है बुल्स की पार्टी लेकिन कोरोना डाल सकता है रंग में भंग

जून 2020 में दिखी 7 फीसदी की रैली ने एक और ब्लॉकबस्टर मंथ की उम्मीद जगा दी है
अपडेटेड Jul 10, 2020 पर 18:44  |  स्रोत : Moneycontrol.com

Kshitij Anand


जून 2020 में दिखी 7 फीसदी की रैली ने एक और ब्लॉकबस्टर मंथ की उम्मीद जगा दी है लेकिन पूरी दुनिया में कोरोना के बढ़ते मामले और जून तिमाही के कमजोर नतीजों की आशंका उत्साह पर पानी फेरती नजर आ रही है। AceEquity के आंकड़ों पर नजर डालें तो कि  D-Street में पिछले 10 साल के दौरान 6 सालों में जुलाई में तेजड़ियों का दबदबा रहा है। इन 6 सालों में जुलाई 2018 में निफ्टी में 6 फीसदी की 2017 में 5.8 फीसदी की और जुलाई 2016 में करीब 4 फीसदी की बढ़त देखने को  मिली थी।


वहीं दूसरी तरफ 10 साल में से 4 साल ऐेसे रहे हैं जब जुलाई महीने में मंदड़िए हावी रहे हैं। साल 2019 की जुलाई में निफ्टी में 5.6 फीसदी की, 2011 की जुलाई में 2.9 फीसदी की, 2013 की जुलाई में 1.7 फीसदी और 2012 की जुलाई में निफ्टी में 1 फीसदी की गिरावट देखने को मिली थी।


मार्च 2020 के 7,500 के निचले स्तर से  Nifty50 में अब तक 30 फीसदी की रैली देखने को मिली है लेकिन छोटी अवधि में बाजार ओवरबॉट नजर आ रहा है  और 10,900 और 11,000 के आसपास बड़ा रजिस्टेंस नजर आ रहा है।


जुलाई में अब तक निफ्टी में 4 फीसदी की ग्रोथ हो चुकी है जिससे यह संकेत मिलता है कि यह मोमेंटम निफ्टी को इसके अहम रजिस्टेंस लेवल से ऊपर ले जा चुका है। कोरोना के वैक्सीन के आने की उम्मीद, पॉजिटीव मैक्रो आकंड़े, ग्लोबल स्तर पर अच्छी लिक्विडिटी और कुछ अन्य सकारात्मक कारणों के वजह से बुल निश्चित होकर छलांग भर रहा है।


कोरोना वायरस वैक्सीन पर आनेवाली कोई नई खबर और जून तिमाही में आनेवाली मैनजमेंट कंमेट्री बाजार का रुख तय करेगी। 


Reliance Securities के विकास जैन ने मनीकंट्रोल से बातचीत में कहा कि जुलाई के पहले हफ्ते में सभी सेक्टरों में तेजी देखने को मिली और निफ्टी के शेयरों में 4 फीसदी से ज्यादा की बढ़त इस बात का संकेत है कि जुलाई महीना बुल का होगा और हमें मिडकैप शेयरों के साथ ही सभी सेगमेंट में अच्छी बढ़त देखने को मिलेगी।


उन्होंने आगे कहा कि इंडिया इंक के नजरिए से देखें तो यह लॉकडाउन के बाद की पहली तिमाही है और इसमें हमारा ध्यान इस बात पर रहेगा कि कंपनियों के कमाई और मुनाफे पर कोरोना ने कितनी चोट पहुंचाई है। इसके अलावा हमारी नजर आगे की तिमाहियों के आउटलुक पर कंपनियों के प्रबंधन की टिप्पणियों पर भी रहेगा।


CapitalVia Global Research के गौरव गर्ग का भी कहना है कि जून तिमाही के नतीजों के बाद हमें बाजार में एक्शन देखने को मिलेगा जिसको देखते हुए निवेशकों को सलाह है कि वह शॉर्ट टर्म में सतर्क नजरिए से बाजार में कोई निवेश करें।
 
गौरव गर्ग ने आगे कहा कि जुलाई में बाजार के साइडवेज और रेंजबाउंड रहने की उम्मीद है। इसके अलावा सेकेंडरी मार्केट में  FPIs के बिकवाली का दबाव बुल्स की नाक में नकेल लगा सकता है।


संस्थागत निवेशकों की गतिविधि


AceEquity के आकंड़ों से पता चलता है कि पिछले 10 साल में 8 साल विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) जुलाई में  नेट बायर रहे हैं। हालांकि उन्होंने 2019 में जुलाई महीने में 13,000 करोड़ रुपये और 2013 में करीब 7,000 करोड़ रुपये की बिकवाली की है।


इसके अलावा पिछले 10 साल में 7 साल ऐसे रहें है जिसमें जुलाई महीने में DIIs नेट बायर रहे हैं।


ताजे आकंड़ों से पता चलता है कि जून महीने के अधिकांश भाग  में विदेशी निवेशक नेट बायर रहे है लेकिन जुलाई में अभी तक ये नेट सेलर रहे है। इस बीच  IMF ने भी कहा है कि वित्त वर्ष 2021 में भारतीय इकोनॉमी में 4.5 फीसदी की गिरावट देखने को मिलेगी।


Reliance Securities के विकास जैन का कहना है कि जुलाई के पहले हफ्ते में हमें FII की बिकवाली देखने को मिली है लेकिन हमारा विश्वास है कि अगर बाजार में इसी तरह का मोमेंटम बना रहता है तो जुलाई महीने में हमें FII की अच्छी खरीदारी देखने को मिलेगी। उन्होंने आगे कहा कि हमें बाजार में अपना कोई निवेश निर्णय लेते समय कंपनियों के प्रदर्शन पर फोकस रखना चाहिए और उस सेक्टर के लिए ज्यादा पैसा एलोकेट करना चाहिए जहां पर कर्ज कम है, वैल्यूएशन अच्छे हैं, अर्निग विजिबिलिटी अच्छी है और जो अपने लॉन्ग टर्म एवरेज से नीचे नजर आ रहे हैं।


(डिस्क्लेमरः  Moneycontrol.com पर दिए जाने वाले विचार और निवेश सलाह निवेश विशेषज्ञों के अपने निजी विचार और राय होते हैं। Moneycontrol यूजर्स को सलाह देता है कि वह कोई निवेश निर्णय लेने के पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।


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