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आवाज़ अड्डाः अयोध्या पर 5 दिन की सुनवाई पर मुस्लिम पक्ष को आपत्ति क्यों!

सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर मसले पर चल रही सुनवाई में नए-नए ट्विस्ट आ रहे हैं।
अपडेटेड Aug 10, 2019 पर 16:36  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

न जाने कब से इस दिन का इंतजार था। कहा जा रहा था कि सुप्रीम कोर्ट जल्दी से जल्दी सुनवाई करे और अयोध्या विवाद पर फैसला सुनाए। अब सुप्रीम कोर्ट ने इसे फास्ट ट्रैक कर दिया है। यानी हर रोज़ सुनवाई होगी। सोमवार से शुक्रवार तक रोज़ सुप्रीम कोर्ट इस मामले को सुनेगा। अभी इस मामले में पक्षकार निर्मोही अखाड़ा और रामलला विराजमान की दलीलें सुनी जा रही हैं। उसके बाद तीसरे पक्षकार सुन्नी वक्फ बोर्ड की दलीलें सुनी जाएंगी। फास्ट ट्रैक सुनवाई से मामले के जल्दी निपटारे की उम्मीद बढ़ गई है। लेकिन मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने हफ्ते में पांच दिन की सुनवाई पर एतराज जता दिया है। इससे एक नया विवाद खड़ा हो गया है। हालांकि कोर्ट ने अपना फैसला नहीं बदला। यानी सुनवाई ऐसे ही रोजाना चलेगी। 


सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर मसले पर चल रही सुनवाई में नए-नए ट्विस्ट आ रहे हैं। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट निर्मोही अखाड़ा और रामलला विराजमान की दलीलें सुन रहा है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई हफ्ते में तीन दिन के बजाए पांच दिन करने का एलान किया था। इस पर सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने आपत्ति जताई। धवन ने कहा कि वो हफ्ते में पांच दिन सुनवाई के लिए कोर्ट की मदद नहीं कर सकते। ये एक हफ्ते का मामला नहीं है। सुनवाई लंबे समय तक चलेगी। हमें दिन-रात अनुवाद के कागज पढ़ने होते हैं। उन्होंने कोर्ट में कहा कि उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है।


हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मामले की हफ्ते में पांच दिन सुनवाई जारी रहेगी। हिंदू पक्षकार सुन्नी वक्फ बोर्ड के रवैये पर सवाल उठा रहे हैं।


सुप्रीम कोर्ट में निर्मोही अखाड़ा और रामलला विराजमान मजबूती के साथ अपना पक्ष रख रहे हैं। निर्मोही अखाड़ा ने कोर्ट में कहा कि विवादित 2.77 एकड़ जमीन पर उनका ही कब्जा है। 1949 से विवादित स्थान पर नमाज नहीं पढ़ी गई है। जहां नमाज नहीं पढ़ी जाती उसे मस्जिद नहीं माना जा सकता। उन्होंने मांग की है कि वहां से रिसीवर को हटाया जाए और उस जगह की कस्टडी उन्हें दी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने जब निर्मोही अखाड़ा से विवादित जमीन के पजेशन और राजस्व के सबूत मांगे तो उनका कहा था कि 1982 की डकैती में इसके दस्तावेज गायब हो गए।


रामलला विराजमान के वकील के. परासरन ने अपनी दलील में कहा कि राम को मानने वालों की आस्था ही सबूत है। सदियों बाद कैसे राम के पैदा होने के सबूत दिए जा सकते हैं। वाल्मीकि रामायण में उल्लेख है कि राम अयोध्या में पैदा हुए थे। उन्होंने कहा कि कानूनी तौर पर जन्मस्थान को पक्षकार बनाया जा सकता है।


सुप्रीम कोर्ट में नियमित सुनवाई से हिंदू पक्षकारों में राम मंदिर के जल्द निर्माण की उम्मीद बढ़ गई है।


चीफ जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। उनके रहते सुनवाई पूरी हो जाए इसलिए उन्होंने इस मामले को फास्ट ट्रैक कर दिया है। सवाल ये है कि क्या मुस्लिम पक्ष जानबूझकर इस मामले को लटकाना चाहता है? पहले दोनों पक्ष सुप्रीम कोर्ट में फास्ट ट्रैक सुनवाई की मांग कर रहे थे। फिर मुस्लिम पक्ष की तरफ से हफ्ते में पांच दिन सुनवाई पर आपत्ति क्यों जताई जा रही है? सवाल ये भी है कि क्या हिंदू पक्ष के पास विवादित जमीन पर मालिकाना हक साबित करने के सबूत हैं? और सबसे बड़ा सवाल ये कि क्या कोर्ट इस मामले में आस्था का ध्यान रखेगा?


 


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