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सुप्रीम कोर्ट में आज रहा सुप्रीम फैसलों का दिन

प्रकाशित Wed, 26, 2018 पर 16:45  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सुप्रीम कोर्ट में ऐसे मौके ज्यादा नहीं आते जब एक साथ कई बड़े फैसले दिए जाएं। लेकिन आज का दिन सुप्रीम फैसलों का दिन रहा जब सुप्रीम कोर्ट ने 3 बड़े और अहम फैसले दिए हैं। पहला फैसला है आधार कार्ड का जहां पर सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि आधार कार्ड पूरी तरह से संवैधानिका है। हांलाकि कोर्ट ने ये साफ कर दिया है उसका इस्तेमाल कहां होगा और कहां नहीं। दूसरा फैसला है एससी/एसटी को प्रोमोशन में आरक्षण का जहां कोर्ट ने इस राज्यों के हवाले कर दिया है और तीसरा लेकिन एक और अहम फैसला है कि अब जनता से जुड़े बड़ें मामलों की सुनवाई का सुप्रीम कोर्ट से सीधा प्रसारण किया जाएगा।


सुप्रीम कोर्ट ने आधार पर अहम फैसले में कहा है कि आधार कार्ड संवैधानिक तौर पर वैध है। 5 में से 3 जजों का आधार के पक्ष में फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आधार कार्ड पूरी तरह सुरक्षित है, आधार से गरीबों को ताकत और पहचान मिली। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि आधार के आंकड़े 6 महीने तक रखे जा सकेंगे, आधार का डाटा साझा नहीं किया जा सकेगा और घुसपैठियों को आधार नहीं मिलना चाहिए।


सुप्रीम कोर्ट ने ये भी निर्देश दिया है कि निजी कंपनियां आधार के डाटा का इस्तेमाल नहीं कर सकती। टेलीकॉम कंपनियां, बैंक आधार की मांग नहीं कर सकते। स्कूल, कॉलेज, एनईईटी आधार की मांग नहीं कर सकते। सरकार डेटा प्रोटक्शन पर कानून बनाए। उपभोक्ता आधार पर शिकायत कर सकता है। स्कूल बच्चे से आधार कार्ड की मांग नहीं कर सकते। बालिग होने पर आधार से हटने का विकल्प होगा। किसी को भी आधार नहीं होने के चलते सुविधा से वचिंत नहीं किया जा सकता। नेशनल सिक्योरिटी के चलते सरकार आधार डाटा नहीं मांग सकती। हालांकि पैन कार्ड को आधार से जोड़ना अनिवार्य होगा।


वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है, लेकिन कहा है कि मोबाइल या प्राइवेट कंपनियों के आधार लेने से मना करने के फैसले को बारीकी से देखना होगा। अभी ये नहीं कहा जा सकता कि इसपर पूरी तरह से रोक लग गई है। वित्त मंत्री ने ये भी कहा है कि आधार के आने से सरकारी योजनाओं में हर साल 90 हजार करोड़ की बचत होती है। इसलिए कोर्ट का ये फैसला ऐतिहासिक है।


उधर कांग्रेस के नेता कपिल सिब्बल ने आधार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सरकार की हार बताया है। उन्होने हमारे साथ खास बातचीत में कहा कि फैसले से आधार की आड़ में सरकार की तरफ से हो रही आम जनता की निगरानी पर लगाम लगेगी।


कानून और आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि आधार के पीछे सरकार की मूल भावना सही है। उन्होंने इसे एक एतिहासिक फैसला बताया।


देश की विपक्षी पार्टियों ने भी आधार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। लेकिन विपक्ष इसे सरकार की हार मानता है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया है कि यूपीए सरकार ने आधार को सशक्तिकरण के उपकरण के तौर पर विकसित किया था लेकिन मोदी सरकार ने उसे लोगों को दबाने और सर्विलांस का हथियार बना दिया था। कोर्ट ने कांग्रेस के विजन की रक्षा की है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस फैसले को आइडिया ऑफ इंडिया की जीत बताया है। हालांकि आधार एक्ट को मनी बिल मान लेने से कई नेताओं ने असहमति जताई है। वहीं कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा है कि ये फैसला मोदी सरकार के ऊपर एक न्यायिक तमाचा है।


शुरूआत से आधार योजना के साथ जुड़े रहे नंदन निलेकणी ने आधार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने आधार के संस्थापक सिद्धान्तों को स्पष्ट रुप से मान्यता दी है।


एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्वागतयोग्य है लेकिन बैंक अकाउंट के मामले में आधार लागू होने से लोगों को सुविधा देने में आसानी होती है।


सुप्रीम कोर्ट ने आज प्रोमोशन में आरक्षण का रास्ता भी साफ कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि प्रोमोशन में रिजर्वेशन के लिए पिछड़ेपन का डाटा जुटाने की जरूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रोमोशन में आरक्षण को खारिज नहीं किया है। कोर्ट ने मामला राज्‍यों पर छोड़ दिया है। राज्‍य चाहे तो प्रमोशन में आरक्षण दे सकते हैं। अदालत ने 2006 के फैसले पर पुनर्विचार से इनकार कर दिया। अब ये मामला संवैधानिक पीठ में नहीं जाएगा।


अब आप अदालतों की कार्रवाई को लाइव देख सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग की व्यवस्था को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। कोर्ट का माना है कि लाइव स्ट्रीमिंग से न्याय व्यवस्था में जवाबदेही लेकर आएगी। इससे अदालतों में भीड़भाड़ को कम करने में भी मदद मिल सकती है। लाइव स्ट्रीमिंग के लिए जल्द ही पायलट प्रॉजेक्ट शुरू किया जा सकता है। इसकी शुरुआत सुप्रीम कोर्ट से होगी।