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ऑर्टिकल 370 हटने के बाद, कारोबार में जन्नत बनेगा कश्मीर !

जम्मू-कश्मीर पर सरकार के फैसले के बाद राज्य में कारोबार की नई इबारत लिखी जा सकती है।
अपडेटेड Aug 08, 2019 पर 10:36  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

जम्मू-कश्मीर पर सरकार के फैसले के बाद राज्य में कारोबार की नई इबारत लिखी जा सकती है। बड़े निवेश और कारोबारी बंधनों से मुक्ति के बाद कश्मीरी उत्पादों की पहुंच देश के कोने-कोने तक हो सकती है। बाजार में आप जो प्रीमियम अखरोट या सेब खरीदते हैं वो कश्मीरी नहीं बल्कि अमेरिका या न्यूजीलैंड जैसे देशों से आयात किया जाता है। लेकिन सवाल उठता है कि अच्छी क्वालिटी होते हुए भी कश्मीरी सेब या अखरोट को प्रीमियम प्राइस क्यों नहीं मिल पाता। इसका सबसे बड़ा कारण है देश के दूसरे हिस्सों से कारोबार में टैक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और कानूनी व्यवस्था समेत कई बाधाएं।


आंकड़ों पर नजर डाले तो देश में साल 2018 में 28 करोड़ सेब आयात हुआ जबकि कश्मीर में इसी दौरान 17 लाख टन सेब का उत्पादन हुआ। जानकार मानते हैं कि बेहतर निवेश और तकनीक से उत्पादन में 30 से 40 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं अखरोट के मामले में हम कई देशों को कश्मीरी अखरोट एक्सपोर्ट करते हैं वहीं इसका इंपोर्ट भी लगातार बढ़ रहा है। हालांकि अखरोट के उत्पादन में तेजी से बढ़ोतरी हुई है लेकिन प्रति हेक्टेयर के हिसाब से उत्पादन लगातार घट रहा है।


वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक जम्मू-कश्मीर के मशहूर उत्पादों का एक्सपोर्ट लगातार घट रहा है। अखरोट का एक्सपोर्ट 2014-15 के 132 करोड़ रुपए था जो 2017-18 में घटकर सिर्फ 22 करोड़ रह गया। वहीं मशरुम एक्सपोर्ट 55 करोड़ रुपए से घटकर 8 करोड़ रुपए रह गया। जबकि सिल्क शॉल का एक्सपोर्ट 129 करोड़ रुपए से घटकर 31 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। जानकारों की मानें तो कश्मीरी फूल दुनिया भर में धूम मचा सकते हैं लेकिन अभी तक इसके निर्यात की योजना ही नहीं बनी।


केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद नीतिगत फैसले केंद्र सरकार लेगी। भय का माहौल खत्म होने और स्थिरता आने से टूरिज्म के अलावा फूड प्रोसेसिंग, डेयरी, अत्याधुनिक स्टोरेज जैसे क्षेत्रों में भारी निवेश के दरवाजे खुलेंगे। संभव है बदले माहौल में कश्मीर कारोबार के मामले में भी जन्नत बन जाए।


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