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आरबीआई और सरकार एक बार फिर आमने-सामने

प्रकाशित Fri, 09, 2018 पर 12:44  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

रिजर्व बैंक और सरकार एक बार फिर आमने-सामने हैं। खबर है कि रिजर्व बैंक सरकार के नोटबंदी के मकसद से सहमत नहीं था। 8 नवंबर 2016 को हुई बोर्ड बैठक में रिजर्व बैंक का मानना था कि नोटबंदी से कालाधन बाहर नहीं निकलेगा और इससे इकोनॉमी को नुकसान भी होगा।


आरबीआई ने आपत्तियों के साथ नोटबंदी को स्वीकार किया था। आरबीआई की दलील थी कि नोटबंदी से जीडीपी पर शॉर्ट में नुकसान होगा। नोटबंदी के लिए काला धन और नकली नोट के तर्क ठीक नहीं हैं। नोटबंदी से काला धन बाहर नहीं आएगा। काला धन सोना और रियल एस्टेट में है, लेकिन सोना और रियल एस्टेट पर नोटबंदी का ज्यादा असर नहीं होगा। 400 करोड़ रुपये के नकली नोट बहुत बड़ी समस्या नहीं है। साथ ही बड़े नोट ग्रोथ के लिए सही नहीं है।


दरअसल आरबीआई के पास कुल 10 लाख करोड़ रुपये का रिजर्व है, और इसी रिजर्व को लेकर आरबीआई और सरकार के बीच तकरार है। आरबीआई के पास 7 लाख करोड़ रीवैल्यूएशन रिजर्व है जबकि 20 साल में 2.5 लाख करोड़ रुपये का रिजर्व जुड़ा है। पूर्व चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर अरविंद सुब्रमणियम के मुताबिक आरबीआई के पास जरूरत से ज्यादा रिजर्व है, लेकिन पूर्व गवर्नरों की राय में रिजर्व जरूरी है।