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आम्रपाली ग्रुप पर चला सुप्रीम कोर्ट का डंडा, अब सुधरेंगे बिल्डर!

प्रकाशित Thu, 11, 2018 पर 08:05  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

अपने घर का सपना, कुछ बेईमान बिल्डरों की कारस्तानी से - नाइटमेयर बन जाता है। पूरा पैसा देने के बाद भी अधूरा घर थमा दिया जाता है या फिर वो भी नहीं मिलता। फिर आप लगाते रहिए चक्कर और आपका बिल्डर प्रोजेक्ट पर प्रोजेक्ट लॉन्च करता हुआ दिखेगा। आम्रपाली मामले में पहली बार बिल्डर परेशानी में दिख रहा है। हालांकि इससे आम्रपाली के घर खरीदारों का दुख दूर नहीं हुआ है। लेकिन इससे देश के लाखों घर खरीदारों को एक ताकत मिली है। मगर क्या बिल्डर इससे सबक लेंगे। आज हम बिल्डरों को सबक देंगे ताकि वो ईमानदारी से अपना काम करें और आपको समय पर अपना घर मिले।


अधर में अटके घर खरीदारों को देश की सबसे बड़ी अदालत ने एक नई उम्मीद दी है। आम्रपाली ग्रुप पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 3 डायरेक्टरों को कोर्ट ने पुलिस कस्टडी में भेज दिया है। कोर्ट ने आम्रापाली ग्रुप की संपत्तियां भी सील करने का आदेश देकर साफ कर दिया है कि घर खरीदारों के खून-पसीने की कमाई को लूटकर बिल्डर मौज मस्ती नहीं कर सकते हैं। उनका हक उन्हें देना ही होगा, आम्रपाली ग्रुप के करीब 42,000 खरीदारों के घर अधर में लटके हैं। लेकिन आम्रपाली ग्रुप इस मामले में अकेला नहीं है। देश में तमाम हाउसिंग प्रोजेक्ट्स का बुरा दौर चल रहा है।


प्रॉपइक्विटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक अलग-अलग शहरों में 1,687 प्रोजेक्ट्स में करीब 4.65 लाख यूनिट्स लेटलतीफी की शिकार हैं। दिल्ली-एनसीआर में करीब 1.80 लाख यूनिट्स का भविष्य अधर में हैं। इनमें सुपरटेक, जेपी, यूनिटेक, एयरविल, शुभकामना, रुद्र, प्रीमिआ, बुलंद एलिवेट्स, एलिगेंट और अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे बिल्डर्स शामिल है।


इसके अलावा मुंबई मेट्रोपोलिटन रीजन में भी 1 लाख से ज्यादा घर पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं। इनमें मुंबई समेत नवी मुंबई और ठाणे का एरिया भी शामिल है। बंगलुरु में भी 38 हजार से ज्यादा (38,242) यूनिट्स के पजेशन में देरी हो रही है और यहीं हाल पुणे का भी है। यहां 22 हजार से ज्यादा (22,517) घरों पर काम अधूरा है। इन प्रोजेक्ट्स में 2-8 साल की देरी हो चुकी है। यह भी बताना मुश्किल है कि ये प्रोजेक्ट्स कब पूरे होंगे। इन अटके प्रोजेक्ट्स की कीमत करीब 3.3 लाख करोड़ रुपये है।


अधूरे प्रोजेक्ट्स में अटके घर खरीदार बिल्डर को पुलिस कस्टडी में भेजने जैसे फैसले का स्वागत काफी जोश से करते हैं, लेकिन असल बात तो तब बनेगी जब घर मिलने का ठोस रोडमैप भी नजर आएगा। देश में कई आम्रपाली हैं जो घर खरीदारों के सपनों से खिलवाड़ कर रहें हैं। सवाल ये की इनकी खबर कब ली जाएगी।