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Assembly Elections 2021: 4 राज्यों और 1 UT में मुस्लिम कैंडिडेट्स ने जीतीं 13% सीटें

मुस्लिम उम्मीद्वार को क्षेत्रिय पार्टियों से बड़ा सपोर्ट मिलता दिख रहा है और जनरल सीटों से चुनाव जीतते नजर आ रहे हैं
अपडेटेड May 08, 2021 पर 17:00  |  स्रोत : Moneycontrol.com

हाल के चुनावी रुझानों से पता चलता है कि मुश्किल जन प्रतिनिधियों को रीजनल पार्टियों से बड़ा सपोर्ट मिल रहा है। हालही में संपन्न हुए 4 राज्यों और 1 केंद्र शासित राज्य के चुनाव परिणामों से साफ होता है कि मुस्लिम कैंडिडेट्स बंगाल के तृणमुल कांग्रेस, असम के ऑल इंडिया यूनाइडेट डेमोक्रेटिक फ्रंट  (AIUDF), केरल के द इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) औऱ तमिलनाडु के Dravida Munnetra Kazhagam (DMK) में जगह बनाने में कामयाब रहे हैं।


यह भी बताते चलें कि मुस्लिम कैंडिडेट्स असम और केरल में कांग्रेस और लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट से भी चुनाव जीतने में सफल रहे हैं।


हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में कुल 827 सीटों के लिए मतदान हुए थे। जिसमें से 112 सीटें  मुस्लिम कैंडिडेट्स ने जीती जो हाल में हुए चुनाव में कुल विधानसभा सीटों का 13 फीसदी है।


पत्रकार औऱ लेखक  उर्मिलेश (Urmilesh) का कहना है कि परंपरागत रुप से एक ऑल इंडिया पार्टी के तौर पर पहले कांग्रेस मुस्लिमों को टिकट देती रही थी और कांग्रेस के कैंडिडेट्स के तौर पर मुस्लिम  जीत कर आते भी रहे थे लेकिन कांग्रेस के ढ़लान के साथ और बीजेपी में मुस्लिमों की पूंछ ना होने की वजह से रीजनल पार्टियां मुस्लिमों के लिए बड़ा मंच बनी हैं और वे इन रीजनल पार्टियों की तरफ से सामान्य सीटों पर भी जीत कर आ रहे हैं।


उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बिहार में आरजेडी जैसे क्षेत्रीय दल मुसलमानों को प्लेटफॉर्म उपलब्ध करा रहे हैं। ये क्षेत्रीय पार्टियां ही अब बीजेपी के लिए मुख्य विपक्ष बन गई हैं।


हैदाराबद स्थिति समाचार पत्र सियासत डेली ने लिखा है कि 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजों से पता चलता है कि इन चुनावों में जीत कर आने वाले मुस्लिम उम्मीद्वारों की संख्या में बहुत ही मामूली बढ़त देखने को मिली है।


आकंड़ो पर नजर डाले तो असम और केरल में चुने गए मुस्लिम उम्मीद्वारों में मामूली बढ़त हुई है। वहीं पश्चिम बंगाल तमिलनाडू और पुडुच्चेरी में यथास्थिति कायम है। धार्मिक रुप से ध्रुवीकृति पश्चिम बंगाल में 294 सीटों में से सिर्फ 42 मुस्लिम एमएलए हैं। इन 42 में से 41 ममता बनर्जी के टीएमसी से है।


बता दें कि बंगाल में लगातार विजयी  मुस्लिम कैंडिडेट्स की संख्या में गिरावट देखने को मिली है।  ये 2011 में 59 थी फिर 2016 में बंगाल विधानसभा में मुस्लिम उम्मीदवारों की संख्या 56 पर आ गई और हाल के बंगाल  विधानसभा चुनाव के बाद मुस्लिम उम्मीदवारों की संख्या 42 रह गई है।


जिन लोगों का यह मानना है कि बंगाल में धार्मिक ध्रुवीकरण हुआ है उनको असम पर नजर डालना चाहिए। यहां इस चुनाव के बाद चुनकर आए मुस्लिम विधायकों  की संख्या 2011 के 28 और 2016 के 29 से बढ़कर 31 हो गई है। यह असम में अब तक चुने गए सबसे अधिक मुस्लिम कैंडिडेट्स की संख्या 33 से सिर्फ 2 सीट कम है। बता दें कि 1983 के असम चुनाव में 33 मुस्लिम उम्मीद्वार जीत कर आए थे।


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