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पहरेदार की पहल, फोर्टिस की मनमानी से निजात

प्रकाशित Mon, 05, 2018 पर 12:32  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सीएनबीसी-आवाज़ पर आने वाला टीवी का सबसे बड़ा कंज्यूमर शो पहरेदार ग्राहक की आवाज़ बुलंद करता है और लड़ता है ग्राहक के हक की लड़ाई। जब कंपनियों की मनमानी के सामने कंज्यूमर झुकने लगता है, तब उनके हक की आवाज़ लेकर पहरेदार करता है कंपनी से सवाल और कंपनी को देना होता है जवाब।


पहरेदार के जरिए उन लोगों को इंसाफ मिल पाता है जो कंपनियों के अड़ियल रवैये के चलते उन जरूरी सर्विसेज से महरूम रह जाते हैं जो उनका हक है। पहरेदार उन कंपनियों को भी सबक सिखाता है जो वादे तो कर देती हैं लेकिन उन्हें पूरे करने में आनाकानी करती हैं।


आज पहरेदार के रडार पर है फोर्टिस हॉस्पिटल। राजपुरा पंजाब के सुमित असीजा ने अपने पिताजी को फोर्टिस हॉस्पिटल में भर्ती किया, जब ने डिस्चार्ज हुए तो बिल को लेकर काफी लंबी बहस चलती है और इसके बाद कह दिया जाता है कि जब इंश्यरेंस क्लेम मिलेगा तो सेटल कर लिया जाएगा।


सुमित असीजा ने बताया कि इंश्योरेंस कंपनी ने 77000 रुपये के क्लेम को मंजूरी दी थी लेकिन डिस्चार्ज के वक्त फोर्टिस ने 72000 रुपये ही लौटाए। कम क्लेम के पीछे अस्पताल ने 10 फीसदी चार्ज काटने का हवाला दिया, जबकि इंश्योरेंस कंपनी ने 10 फीसदी कटौती के बाद ही 77000 रुपये का क्लेम दिया था।


फोर्टिस हॉस्पिटल को कागजात दिखाने पर भी कोई सुनवाई नहीं हुई, अस्पताल ने 40 दिन बाद आने को कहा। फोर्टिस ने इंश्योरेंस कंपनी से पैसे न मिलने का हवाला दिया जबकि इंश्योरेंस कंपनी ने क्लेम के पूरे पैसे देने का दावा किया।


पहरेदार की कोशिश के बाद ग्राहक की उम्मीद बढ़ी। 4-5 दिन बाद ही फोर्टिस से कॉल आई। फोर्टिस ने बताया कि इंश्योरेंस कंपनी से पैसे आ गए हैं। पैसे ट्रांसफर के लिए एकाउंट की जानकारी भी मांगी।