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आत्मनिर्भर भारत के तहत निवेश बढ़ाने की कवायद तेज, 6 महीने में निवेश के 100 बड़े प्रस्ताव का टार्गेट

आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत निवेश बढ़ाने की कोशिशें तेज हो गई हैं।
अपडेटेड Jun 19, 2020 पर 18:24  |  स्रोत : Moneycontrol.com

आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत निवेश बढ़ाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। CNBC-आवाज़ को सूत्रों के हवाले से एक्सक्लूसिव जानकारी मिली है कि एम्पावर्ड ग्रुप ऑफ सेक्रेटरीज अगले 6 महीने में इनवेस्टमेंट के 100 बड़े प्रस्ताव ला सकती है। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत निवेश बढ़ाने के एक्शन प्लान के जरिए अगले 6 महीने में 100 बड़े प्रस्ताव लाने का लक्ष्य है। सूत्रों के मुताबिक एम्पावर्ड ग्रुप ऑफ सेक्रेटरीज ने  टार्गेट  तय कर लिया है। नीति आयोग CEO की अगुवाई में  ग्रुप की पहली बैठक हुई है।  इसके लिए मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रा समेत कई सेक्टर की पहचान की गई है। सूत्रों के मुताबिक इसके लिए हर मंत्रालय में एक नोडल ऑफिसर होगा।  राज्यों के लिए एक मॉडल MoU तैयार होगा। इस मॉडल MoU के आधार पर निवेश के करार होंगे।​


इसी क्रम में मनीकंट्रोल से एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कुछ खास सेक्टरों की भी पहचान की गई है। पहचाने गए सेक्टर में उत्पादों की गुणवत्ता और इनके घरेलू उत्पादन को बढ़ाने पर फोकस किया जायेगा जिससे कि इनके लिए आयात पर निर्भरता खत्म हो।


पीएम मोदी द्वारा आत्मनिर्भर भारत के तहत पहचाने गए फुटवेयर, फर्नीचर और एयर कंडिशनर जैसे सेक्टरों के अलावा डिपार्टमेंट ऑफ प्रोमोशन फॉर इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड  (DPIIT) ने कैपिटल गुड्स मशीनरी, मोबाइल, इलेक्ट्रोनिक, जेम्स एंड ज्वेलरी, फार्मास्टियूक्ल, टेक्सटाइल और गारमेंट जैसे सेक्टरों को भी इस दायरे में लाने का निर्णय लिया है। 


एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि यह सबकुछ एक दिन में नहीं होगा। भारी प्रतियोगिता का सामाना करना एक चुनौती है। सबसे पहले तो हमें आयात पर निर्भरता कम करने के लिए अपना घरेलू प्रोडक्शन कई गुना बढ़ाना होगा। इसके अलावा एक्सपोर्ट की संभावनाएं भी तलाशनी होंगी। इसके लिए सबसे पहले तो हमें भारत को मैन्यूफैक्चरिंग हब बनाने के लिए पहचाने गए सेक्टरों में भारी निवेश करना होगा और बाहर से भी निवेश आर्कषित करना होगा। सरकार इन्हीं चीजों को ध्यान में रखकर काम कर रही है।


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