आवाज़ अड्डाः 2019 चुनाव, सरकार चुस्त-विपक्ष सुस्त! -
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आवाज़ अड्डाः 2019 चुनाव, सरकार चुस्त-विपक्ष सुस्त!

प्रकाशित Thu, 15, 2018 पर 20:47  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

2019 के आम चुनाव में तय है कि एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टीम होगी, लेकिन उनके सामने भी कोई टीम होगी, या अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग टीमों से उनका मुकाबला होगा। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस विपक्ष की धुरी बनेगी या सबको एकजुट करने के लिए एक बार फिर सोनिया गांधी को सामने आना पड़ेगा। ऐसे कई सवाल हैं, जिनके जवाब नहीं मिल रहे हैं और अब मुश्किल से एक साल का वक्त बचा है।


हरियाणा में बीजेपी अध्यक्ष बाइक पर सवाल होकर लोकसभा चुनाव के लिए अलख जगा रहे हैं। अमित शाह पिछले डेढ़ साल से अभियान पर हैं। लेकिन जिन्हें उनसे मुकाबला करना है, वो कहां हैं।


कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, ये और इनके जैसे दूसरे गैर बीजेपी दल अगर हाथ भी मिला लें तो शायद मोदी शाह की जोड़ी को थोड़ा चैलेंज दे सकते हैं। लेकिन सत्ता की राजनीति अगर-मगर-किंतु-परंतु से नहीं चलती और विपक्ष की पार्टियां अभी इसी में फंसी हैं।
 
विपक्ष को एकजुट करने की कोई ठोस पहल दिखाई नहीं देती, लेकिन सीपीएम ने अपने राजनीतिक प्रस्ताव में ये साफ कर दिया है कि कांग्रेस के साथ न तो कोई समझौता होगा और ना चुनावी गठबंधन। यूपी विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस-समाजवादी पार्टी का गठबंधन शीत निद्रा में चला गया। ममता बनर्जी, मायावती और शरद पवार सरीखे नेता अलग-अलग ताल ठोक रहे हैं। कांग्रेस ने राहुल गांधी को अध्यक्ष बना दिया, लेकिन विपक्ष के कितने दिग्गज उनका नेतृत्व स्वीकार करेंगे, कहा नहीं जा सकता।


ऐसे में सवाल उठता है कि क्या 2019 के पहले विपक्ष के दल एकजुट हो पाएंगे? या फिर चुनाव की पूर्व संध्या पर अलग-अलग राज्यों में सीटों पर स्ट्रैटेजिक तालमेल देखने को मिलेगा? लेकिन सबसे बड़ा सवाल कि जब विपक्ष के सारे दल बीजेपी को रोकने के लक्ष्य के साथ चुनाव में उतरना चाहते हैं तो फिर एकता में अड़चन क्या है?