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आवाज़ अड्डाः मंदी की गिरफ्त में देश की इकोनॉमी, सरकार के बड़े एलानों से बदलेगी सूरत?

इकोनॉमी स्लोडाउन से गुजर रही है। तरक्की की रफ्तार का इंडिकेटर GDP का नंबर यही कहानी कह रहा है।
अपडेटेड Sep 02, 2019 पर 11:42  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

इकोनॉमी स्लोडाउन से गुजर रही है। तरक्की की रफ्तार का इंडिकेटर GDP का नंबर यही कहानी कह रहा है। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में GDP ग्रोथ महज 5% पर ठहर गई है- ये 25 तिमाही में सबसे सुस्त ग्रोथ है। वैसे सरकार ने इकोनॉमी को मंदी से बाहर निकालने के लिए कई बड़े फैसले किए हैं। लेकिन सवाल है कि इकोनॉमी में जान भरने के लिए क्या ये काफी हैं।


सुस्त इकोनॉमी को रफ्तार देने के लिए सरकार एक के बाद एक बड़े कदम उठा रही है। पिछले हफ्ते ऑटो सेक्टर, बैंकिंग, NBFC और MSME सेक्टर को बड़ी राहत देने के बाद अब वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने बैंकिंग सेक्टर में बड़े रिफॉर्म का एलान कर दिया है। इकोनॉमी को दूसरे बूस्टर शॉट के तहत वित्त मंत्री ने PSU बैंकों के मर्जर का एलान किया।


वित्त मंत्री ने पंजाब नेशनल बैंक में यूनाइटेड बैंक और ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स के मर्जर का एलान किया। मर्जर के बाद ये देश का दूसरा सबसे बड़ा बैंक होगा। वहीं केनरा बैंक का सिंडिकेट बैंक के साथ मर्जर होगा। यूनियन बैंक, आंध्र बैंक और कॉर्पोरेशन बैंक का मर्जर एक साथ होगा। जबकि इंडियन बैंक का इलाहाबाद बैंक में मर्जर होगा। इस मर्जर के बाद देश में PSU बैंकों की संख्या 27 से घटकर 12 रह जाएगी। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में GDP ग्रोथ 5% पर पहुंच गई है। ये GDP का 25 तिमाहियों में सबसे कम स्तर है।


मैन्युफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन, माइनिंग और रियल एस्टेट सेक्टर में अच्छी खासी गिरावट देखने को मिली है। सरकार को इकोनॉमी में मंदी का एहसास है। इसलिए सरकार ने FDI के लिए रेड कार्पेट बिछा दिया है। सरकार ने सिंगल ब्रांड रिटेल में विदेशी पूंजी लाने के लिए लोकल सोर्सिंग के नियम आसान कर दिए। कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग में 100 परसेंट और डिजिटल मीडिया में 26% FDI को भी मंजूरी मिल गई है।


कोल माइनिंग में भी अब ऑटोमेटिक रूट से 100% FDI आ सकता है। वित्त मंत्री कह चुकी हैं कि आने वाले दिनों में कुछ और बड़े एलान होंगे। सवाल ये है कि क्या मंदी दूर करने के लिए सरकार जो कदम उठा रही है वो काफी हैं। क्या सरकार के प्रयासों से इकोनॉमी को रफ्तार मिलेगी? इकोनॉमी में जान फूंकने के लिए पॉलिसी रिफॉर्म से काम चल जाएगा या सरकार को कोई बड़ा राहत पैकेज देना होगा?


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