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आवाज़ अड्डाः करतारपुर बनेगा बातचीत का कॉरिडोर!

प्रकाशित Thu, 29, 2018 पर 07:36  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सिखों के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। बहुत बड़ी खुशखबरी। करतारपुर यानि वो जगह जहां गुरु नानक देव ने अपनी चार प्रसिद्ध धर्म यात्राओं को पूरा करने के बाद आखिरी 18 साल बिताए और फिर यहीं उन्होंने समाधि ली थी। भारत के सिखों के लिए अब करतारपुर के गुरुद्वारा दरबार साहिब तक बिना वीज़ा जाने का रास्ता खोलेगा करतारपुर कॉरिडोर। लेकिन क्या इसके साथ भारत पाकिस्तान के रिश्तों का एक नया दौर शुरू होगा।  इसपर सफाई आनी बाकी है।


शिलान्यास के वक्त पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारत के साथ रिश्ते सुधारने की बात की है। लेकिन वो कश्मीर का जिक्र छेड़ने से बाज नहीं आए। कार्यक्रम में खालिस्तान समर्थकों और आतंकवादी हाफिज सईद के करीबी सहयोगी की मौजूदगी भी पाकिस्तान के इरादों पर शक पैदा करती है। वहीं नवजोत सिंह सिद्धू पाकिस्तान जाकर इस कॉरिडोर का पूरा क्रेडिट इमरान खान को दे देते हैं। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने साफ-साफ कह दिया कि जब तक आतंकवाद पर रोक नहीं लगती पाकिस्तान के साथ कोई बातचीत नहीं होगी। ऐसे में सवाल ये है कि क्या करतारपुर कॉरिडोर से भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत का रास्ता खुलेगा?


पाकिस्तान में करतारपुर कॉरिडोर के शिलान्यास को दोनों देशों के बीच नए रिश्तों की आधारशिला के रूप में देखा जा रहा है। भारत सरकार लंबे समय से सिखों के पवित्र तीर्थ स्थल गुरुद्वारा करतारपुर साहिब के लिए कॉरिडोर बनाने की मांग कर रही थी। लेकिन पाकिस्तान में कप्तान बदलने के बाद अब जाकर इमरान खान ने इस पर सकारात्मक रुख दिखाया है। वो भारत के साथ अच्छे रिश्तों की बात कर रहे हैं। लेकिन इस मौके पर उन्होंने एक बार फिर कश्मीर का राग छेड़ दिया।


भारत एक कदम आगे बढ़ाएगा तो वो दो कदम आगे बढ़ाएंगे, ये बात इमरान खान दोहराते रहते हैं। लेकिन सीमा पार से आतंकवादी गतिविधियों को रोक पाने में वो नाकाम रहे हैं। भारत ने साफ कर दिया है कि आतंकवाद और संवाद साथ नहीं चल सकता है। बातचीत की जो पेशकश इमरान कर रहे हैं उस पर भारत अब भी अपने रुख पर कायम है।


दोनों देशों के बीच तल्खी इस समारोह में भी नजर आई। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज खुद नहीं गईं। उन्होंने दो केंद्रीय मंत्रियों को वहां भेज दिया। वहीं अगस्त में इमरान खान के शपथग्रहण समारोह में नवजोत सिंह सिद्धू ने पाकिस्तान आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा को गले लगाकर विवाद खड़ा कर दिया था। इस बार भी वो बिना केंद्र और पंजाब सरकार की मंजूरी के पाकिस्तान पहुंच गए और इमरान खान की तारीफ में पुल बांध दिए।


लेकिन पाकिस्तान यहां भी अपनी हरकत से बाज नहीं आया। पंजाब में अलगाववादियों को भड़काने में पाकिस्तान का हाथ माना जाता है। शिलान्यास के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में खालिस्तान समर्थक मौजूद थे। इतना ही नहीं आतंकवादी हाफिज सईद का करीबी गोपाल चावला जनरल बाजवा के साथ खड़ा दिखाई दिया। सवाल उठ रहे हैं कि क्या पाकिस्तान की कथनी और करनी में फर्क है? क्या वो रिश्ते सुधारने को लेकर गंभीर भी है। या सिर्फ ढोंग कर रहा है। क्या दोनों देशों के बीच बातचीत का रास्ता भी खुलेगा या पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद रोड़ा बना रहेगा?