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मोदी के आगे खाली पड़ा इमरान का दांव, जंग की बात सिर्फ ध्यान खींचने की चाल!

कश्मीर के मुद्दे पर चीन को छोड़ पाकिस्तान के साथ कोई देश खड़ा नजर नहीं आ रहा है।
अपडेटेड Aug 21, 2019 पर 11:57  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

पुलवामा में आतंकवादी हमले के बाद भारत ने अपनी डिप्लोमैसी से जिस तरह पाकिस्तान को दुनियाभर में अलग-थलग कर दिया था, उसकी बानगी एक बार फिर दिख रही है। कश्मीर के मुद्दे पर चीन को छोड़ पाकिस्तान के साथ कोई देश खड़ा नजर नहीं आ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से बातचीत ने दिखा दिया है कि भारत और अमेरिका की दोस्ती किस स्तर पर है। अमेरिका पाकिस्तान के साथ नहीं खड़ा है। उधर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी अमेरिकी रक्षा मंत्री मार्क एस्पर से बात करके बता दिया कि कश्मीर हमारा अंदरूनी मामला है। पाकिस्तान बौखला गया है। युद्ध और कश्मीर में जेहाद छेड़ने की धमकी दी जा रही है।


संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मुंह की खाने के बाद पाकिस्तान को मोदी की डिप्लोमैसी ने एक और झटका दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप से फोन पर करीब आधा घंटे बात की जिसमें उन्होंने पाकिस्तान की बौखलाहट और गीदड़ भभकी के बारे में ट्रंप को बताया। पाकिस्तान का नाम लिए बगैर प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ नेताओं का भारत के खिलाफ हिंसक रवैया शांति की प्रक्रिया में बाधक है। शांति बनाए रखने के लिए आतंक और हिंसा मुक्त माहौल जरूरी है। सीमा पार से आतंकवाद पर लगाम लगाए बिना शांति संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर कोई देश शांति के रास्ते पर चलता है तो भारत उसका साथ देगा।
 
इसके बाद ट्रंप ने इमरान खान को फोन किया और भारत के साथ संबंधों में शांति बनाए रखने की अपील की। साथ ही इमरान को आक्रामक बयान देने से बचने की सलाह भी दी। बीजेपी मोदी की डिप्लोमैसी को कारगर बता रही है। कुछ दिन पहले ट्रंप ने कहा था कि वो कश्मीर मसले को हल करने के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता के लिए तैयार हैं। इसे लेकर काफी विवाद खड़ा हो गया था। कांग्रेस का कहना है कि वो पाकिस्तान के मामले में सरकार के साथ है। लेकिन वो सरकार को आगाह भी कर रही है।


AIMIM के सांसद असदुद्दीन ओवैसी सरकार से पूछ रहे हैं कि पूरे मामले में अमेरिका का क्या लेना देना है। कश्मीर के मसले पर दुनियाभर में अलग-थलग पड़ने के बाद पाकिस्तान बुरी तरह बौखला गया है। पाकिस्तानी टीवी चैनल के साथ बातचीत में भारत में रहे पाकिस्तान के तीन पूर्व उच्चायुक्त कश्मीर में जेहाद को समर्थन देने की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इमरान खान सरकार का ये अधिकार है कि वो कश्मीर में सशस्त्र विद्रोह का समर्थन करे क्योंकि ये अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक है। पूर्व उच्चायुक्तों ने पाकिस्तान के इरादे जाहिर कर दिए हैं। सवाल ये है कि क्या मोदी और ट्रंप की दोस्ती पाकिस्तान पर भारी पड़ रही है? मोदी से बात करने के बाद ट्रंप ने इमरान को जो डोज दी है, उसके बाद क्या पाकिस्तान का रुख नरम पड़ेगा? क्या ट्रंप से बातचीत को मोदी का बढ़िया डिप्लोमैटिक कदम माना जाए?


 


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