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आवाज़ अड्डाः संजू बायोपिक, कितना हकीकत- कितना फसाना!

प्रकाशित Fri, 13, 2018 पर 20:43  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

राजकुमार हिरानी ने संजू फिल्म क्यों बनाई- क्या वो दर्शकों के एंटरटेनमेंट के साथ कुछ कमाई भी कर लेना चाहते थे या संजू सिर्फ संजय दत्त की इमेज मेकओवर की कोशिश है। इस फिल्म के रिलीज होने के बाद से कुछ लोग ये सवाल उठाते रहे हैं। लेकिन सीधा हमला आरएसएस के मुखपत्र पाञ्चजन्य ने किया है। पाञ्चजन्य का कहना है कि हिरानी को संजय दत्त की जिदंगी में ऐसा क्या खास दिखा जिसे वो लोगों को बताना चाहते हैं। क्या संजय दत्त हमारे रोल मॉडल हो सकते हैं।


अंडरवर्ल्ड सरगनाओं के प्रति हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के लगाव पर भी पाञ्चजन्य ने सवाल उठाए हैं। लेकिन सवाल इतना सीधा नहीं है। बायोपिक बनाने की क्या कुछ शर्तें होंगी- किस पर बनेगा  क्या तथ्य होंगे क्या नहीं। इसके खिलाफ तर्क ये है कि हम एक खुला बाजार हैं जिसे देखना हो देखे, या ना देखे। फिल्म, साहित्य, कला में रचनात्मक स्वतंत्रता जैसी बात भी होती है जिसकी हदें आप तय नहीं कर सकते। अगले एक घंटे हम इन्हीं मुद्दों पर बात करेंगे कि संजू एक रचनात्मक कृति है या सिर्फ पीआर एक्सरसाइज।


नायक से खलनायक बने फिल्म अभिनेता संजय दत्त की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। लेकिन अब उनकी जिंदगी पर बनी फिल्म पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। सवाल उठाए हैं आरएसएस के मुखपत्र पांचजन्य ने और निशाने पर हैं फिल्म संजू के निर्देशक राजकुमार हिरानी और खुद संजय दत्त।


पांचजन्य में लिखा गया है कि संजू बनाने के पीछे राजकुमार हिरानी का मकसद क्या संजय दत्त की छवि में सुधारना है या बॉक्स ऑफिस पर पैसा बटोरना? क्या हिरानी को संजय दत्त की जिंदगी ऐसी लगती है जिसमें युवाओं को सीखने के लिए बहुत कुछ है? ये संजय दत्त ही हैं जिनकी 1993 में मुंबई बम धमाकों के अपराधियों से साठगांठ थी और जिसके लिए उन्हें जेल की सजा काटनी पड़ी । पांचजन्य में सवाल किया है कि क्या संजय दत्त की जिंदगी एक बायोपिक है? और क्या संजू किसी के दागदार दामन को साफ-सुथरा बनाने के लिए करोड़ों रुपए बहाकर चलाया गया पीआर अभियान है?


पांचजन्य ने फिल्म इंडस्ट्री पर भी निशाना साधते हुए लिखा है कि बॉलीवुड, माफिया और अंडरवर्ल्ड को महिमामंडित करने वाली फिल्में बना रहा है। संजू की आलोचना को लेकर कांग्रेस की पूर्व सांसद और संजय दत्त की बहन प्रिया दत्त ने पांचजन्य को जवाब दिया है । सीएनएन-न्यूज18 के साथ खास बातचीत में प्रिया दत्त ने कहा
हर किसी के अपने विचार होते हैं। आरएसएस हर उस चीज के खिलाफ है जो सकारात्मक है। संजय दत्त रोल मॉडल हैं। मुझे समझ नहीं आ रहा कि विवाद क्यों है?


बॉलीवुड में माफिया और अंडरवर्ल्ड के ऊपर फिल्में पहले भी बनती रही हैं । लेकिन संजू में संजय दत्त की जिंदगी के कुछ पहलुओं को छिपाने और रंगीन मिजाज जिंदगी को महिमामंडित करके दिखाने पर पांचजन्य ऐतराज जता रहा है । यहां सवाल ये है कि किसी इंसान की जिंदगी पर आधारित फिल्म-बायोपिक बनाने की क्या कुछ बुनियादी शर्तें होंगी?


रचनात्मक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर क्या कोई डायरेक्टर किसी घटना को अपनी सहूलियत के हिसाब से पेश करने को स्वतंत्र है? संजय दत्त अपने जुर्म की सजा काट चुके हैं तो क्या इसके बाद भी वो हमेशा अपराधी के रूप में ही दिखाए जाएंगे? या फिल्म बनाने वाले ने तथ्यों के साथ हेरफेर कर उन्हें रोल मॉडल के तौर पर पेश किया है?