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आवाज़ अड्डाः अनुच्छेद 370 पर क्या पाकिस्तान करेगा किसी दुस्साहस की हिमाकत!

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीर में भले जितना बवाल नहीं मचा उससे ज्यादा पाकिस्तान बौखलाया हुआ है।
अपडेटेड Aug 16, 2019 पर 12:44  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीर में भले जितना बवाल नहीं मचा उससे ज्यादा पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। कश्मीर के मुद्दे पर भारत के खिलाफ मोर्चा खोलने की पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की हर कोशिश फेल हो गई है। पाकिस्तान जिनको अपना दोस्त मानता था वो भी उसे घास नहीं डाल रहे। इमरान खान इतने बौखला गए हैं कि वो अब RSS की विचारधारा को कोस कर पाकिस्तान की जनता को गुमराह कर रहे हैं। उधर पाकिस्तान में खाने के लाले पड़े हैं और इमरान खान भारत को जंग की धमकी दे रहे हैं।


जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद पाकिस्तान बुरी तरह से बौखला गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कश्मीर के मुद्दे को उछालने और भारत की शिकायत करने के लिए पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र समेत अमेरिका, रूस, चीन जैसे देशों से मदद की गुहार लगाई। लेकिन इमरान खान को हर जगह मुंह की खानी पड़ी। इसके बाद भी वो बाज नहीं आ रहे।


पाकिस्तान ने चिट्ठी लिखकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग की है। वहीं पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर इमरान खान पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की विधानसभा पहुंचे और बीजेपी, RSS को जमकर कोसा। उन्होंने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले को पीएम मोदी की रणनीतिक भूल बताया।


इमरान खान को बालाकोट की भी याद आ गई। उन्होंने बातों बातों में माना कि भारत ने पुलवामा में आतंकवादी हमले के बाद बालाकोट में एयर स्ट्राइक की थी। इमरान ने कहा कि अब भारत पीओके की तरफ आ सकता है। लेकिन उनकी सेना जंग के लिए तैयार है। वो जंग को लेकर अंतरराष्ट्रीय जगत को भी चेता रहे हैं।


इधर प्रधानमंत्री मोदी ने IANS को दिए इंटरव्यू में कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद पाकिस्तान भौचक्का रह गया है। प्रधानमंत्री ने सवाल पूछा कि जो लोग अनुच्छेद 370 हटने का विरोध कर रहे हैं उसके पीछे उनका तर्क क्या है?


सवाल ये है कि मुंह की खाने के बाद भी पाकिस्तान जिद पर क्यों अड़ा हुआ है? संयुक्त राष्ट्र पहले ही कह चुका है कि कश्मीर द्विपक्षीय मुद्दा है। शिमला समझौते के तहत इसमें तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं हो सकती। फिर भी इमरान खान पीओके में कश्मीर का मुद्दा उठाकर क्या साबित करना चाहते हैं? वो बीजेपी, RSS की विचारधारा को लेकर पाकिस्तान की जनता में भ्रम क्यों फैला रहे हैं? क्या वो ये सब इसलिए कर रहे हैं क्योंकि कश्मीर का मुद्दा उनके हाथ से निकल गया है। और उनके सारे दांव फेल हो गए हैं?


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