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आवाज़ अड्डाः मी टू मुहिम से महिलाओं को मिलेगा इंसाफ!

प्रकाशित Fri, 12, 2018 पर 07:59  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

भारत में मी टू मूवमेंट रफ्तार पकड़ रहा है। एनटरटेनमेंट, मीडिया स्पोर्ट्स से जुड़ी कई महिलाओं ने कई बड़े लोगों की पोल खोल दी है। सोशल मीडिया पर नाम लेकर शर्मसार करने की इस मुहिम के बाद तनुश्री दत्ता जैसी कुछ महिलाओं ने इसे अंजाम तक पहुंचाने के लिए पुलिस में मामला भी दर्ज किया है। कई संगठनों ने आरोपियों के खिलाफ कुछ एक्शन लिए हैं। सवाल है कि क्या दोहरा चेहरा रखनेवालों को बेनकाब करने भर से काम चल जाएगा। या कसूरवारों को सजा भी दिलाने की कार्रवाई होनी चाहिए।


तनुश्री दत्ता ने नाना पाटेकर पर कोई दस साल पहले उनके साथ सेक्सुअल हैरासमेंट का आरोप लगाया था। लेकिन उनका आरोप है कि उस वक्त उनकी बात दबा दी गई थी। अब उन्होंने एक बार फिर इस मामले को उठाया है और पुलिस में मामला दर्ज कराया है। एन्टरटेनमेंट इंडस्ट्री में कास्टिंग काउच से लेकर फिल्म सेट से लेकर शूटिंग तक महिलाओं के साथ बदसलूकी के मामले हमेशा से उठते रहे हैं। लेकिन पहली बार इसके साथ सोशल मीडिया पर मीटू कैंपेन ने जोर पकड़ लिया। संस्कारी बाबू के नाम से मशहूर एक्टर आलोकनाथ पर उनके साथ पहले काम कर चुकी विन्ता नंदा ने रेप का आरोप लगाया है।


विकास बहल, कैलाश खेर, सुहेल सेठ, अभिजीत भट्टाचार्य, चेतन भगत से लेकर ऋतिक रोशन पर भी सेक्सुअल हैरासमेंट के आरोप लगे हैं।
मीटू मुहिम में जाने माने पत्रकार और अब विदेश राज्यमंत्री एम जे अकबर का नाम भी सामने आया है। कई महिला पत्रकारों ने उनकी रंगीन मिजाजी और महिला सहयोगियों के साथ अनुचित व्यवहार का कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया है। अब उनके इस्तीफे की मांग हो रही है।


सरकार ने एम जे अकबर के मामले में फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं की है। केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी का कहना है कि महिलाएं ऑफिस में शोषण कराने के लिए नहीं जाती हैं । उन्हें उम्मीद है कि जो महिलाएं आरोप लगा रही हैं उन्हें न्याय मिलेगा ।


मीटू मुहिम पर कुछ लोग सवाल भी उठा रहे हैं। उनकी दलील है कि मीटू के जरिए आप आवाज़ तो उठा सकते हैं लेकिन ये इंसाफ पाने का प्लेटफॉर्म नहीं हो सकता। लेकिन मुहिम के समर्थकों का कहना है कि लंबे समय से महिलाओं को परेशान किया जाता रहा है। उनके साथ होनेवाले सेक्सुअल हैरासमेंट को कभी गंभीरता नहीं लिया गया। मी टू जैसे आंदोलन से ऐसी गंदी मानसिकता वाले लोग डरेंगे। इसके जरिए वो अलग अलग प्रोफेशन में आनेवाली नई लड़कियों को ये हिम्मत भी दे रही हैं कि वो ऐसे जुल्म को बर्दाश्त ना करें। इस मकसद में मी टू एक जागृति तो पैदा कर रहा है। लेकिन सवाल ये है कि क्या ये इंसाफ दिलाने का औजार भी बनेगा?