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आवाज़ अड्डा: इकोनॉमी पर सरकार का महामंथन

प्रकाशित Sat, 15, 2018 पर 13:24  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

तेजी से गिरते रुपये और पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों ने सरकार को मुश्किल में डाल दिया है। हालात बिगड़ते देख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वित्त मंत्रालय के आला अधिकारियों के साथ इकोनॉमी को चुस्त करने के लिए मंथन शुरू कर दिया है। लोगों को पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से राहत चाहिए। लेकिन कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और महंगा इंपोर्ट दाम नहीं घटने दे रहा। चुनावी साल में सरकार आम लोगों की नाराजगी नहीं झेलना चाहती। इसलिए राहत देने के लिए कुछ विकल्पों पर विचार चल रहा है जिसका एलान शनिवार को हो सकता है। लेकिन सवाल ये है कि क्या सरकार पेट्रोल, डीजल के दाम तुरंत कम करेगी?


रुपये की गिरावट को थामने और महंगे पेट्रोल-डीजल से आम आदमी को राहत देने के लिए सरकार के अंदर मंथन शुरू हो गया है। चुनावी साल में रुपया और कच्चा तेल इकोनॉमी का खेल ना बिगाड़ ना दें, इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वित्त मंत्रालय और नीति आयोग के के अधिकारियों के साथ बातचीत के बाद बड़े कदम उठा सकते हैं।


सरकार प्रमुख रूप से तीन मुद्दों पर चिंतन कर रही है। गिरते रुपये को कैसे संभाला जाए, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को कैसे रोका जाए और महंगे पेट्रोल-डीजल से आम लोगों को कैसे राहत दी जाए। रुपये की गिरावट रोकने के लिए एनआरआई बॉन्ड जारी करने के विकल्प पर विचार हो सकता है। इसके अलावा डॉलर जारी करने की विंडो को थोड़ा कम किया जा सकता है। वहीं पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत देने के लिए एक्साइज ड्यूटी घटाने पर बात हो सकती है। फिलहाल वित्त मंत्रालय इसके पक्ष में नहीं है। अगर कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़ते हैं तो सरकार पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी और वैट घटाने को कह सकती है। इसके अलावा ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को सब्सिडी का बोझ झेलने के लिए भी कहा जा सकता है।


गिरते रुपये और बढ़ते क्रूड से इकोनॉमी के हालात बिगड़ने का खतरा भी पैदा हो गया है। 2018-19 की पहली तिमाही में करेंट एकाउंट डेफिसिट बढ़कर 1,580 करोड़ डॉलर हो गया है। ये जीडीपी का 2.4 फीसदी है जो पिछली 4 तिमाहियों में ये सबसे ज्यादा है। रुपये में गिरावट की वजह से इंपोर्ट महंगा हो रहा है। इसकी वजह से अगस्त में व्यापार घाटा पिछले साल के मुकाबले 1170 करोड़ डॉलर से बढ़कर 1739 करोड़ डॉलर हो गया है। हालांकि जुलाई के मुकाबले इसमें थोड़ी कमी आई है।


अगर रुपये में गिरावट का सिलसिला ऐसे ही चलता रहा तो इकोनॉमी के हालात बिगड़ सकते हैं। सरकार के लिए राहत की खबर यही है कि जीडीपी तेज रफ्तार के साथ 8.2 फीसदी पर पहुंच गई है और महंगाई भी अभी कंट्रोल में है। अगर पेट्रोल, डीजल के दाम बढ़ते रहे तो महंगाई में आग लगने में देर नहीं लगेगी। सवाल ये है कि क्या सरकार तेल के दाम कम करके लोगों को तुरंत राहत देने की स्थिति में है? और क्या सरकार के मंथन में इकोनॉमी को बूस्ट देने के लिए कोई संजीवनी निकलेगी?