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आवाज़ अड्डा: राफेल पर कौन सच्चा, कौन झूठा

प्रकाशित Sat, 09, 2019 पर 14:13  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

राफेल का वेताल फिर डाल से उतर कर विक्रम के कंधे पर सवार हो गया लगता है। अंग्रेजी अखबार द हिंदू की एक रिपोर्ट में फिर एक सनसनीखेज खुलासा हुआ जिससे राफेल मुद्दा और गरम हो गया है। रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा मंत्रालय ने इस बात पर एतराज जताया था कि प्रधानमंत्री कार्यालय राफेल सौदे में पैरेलल बातचीत कर रहा है। कांग्रेस को तो शायद ऐसे ही हथियार की तलाश थी। राहुल गांधी ने एक बार फिर इस सौदे में भ्रष्टाचार के मामले पर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल ये है कि क्या राफेल सौदे को लेकर बीजेपी बैकफुट पर है? और क्या चुनाव से पहले ये मुद्दा बीजेपी के गले की हड्डी बनता जा रहा है?


राफेल को लेकर एक बार फिर कांग्रेस और बीजेपी के बीच रार छिड़ गई है। अंग्रेजी अखबार द हिंदू में छपी एक रिपोर्ट में ये दावा किया गया कि भारत और फ्रांस के बीच राफेल सौदे के दौरान रक्षा मंत्रालय के साथ-साथ प्रधानमंत्री कार्यालय भी बातचीत कर रहा था। अखबार ने तत्कालीन रक्षा सचिव मोहन कुमार की एक नोटिंग का हवाला दिया है। रक्षा सचिव ने तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर को अपनी चिंता जाहिर की थी। इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सीधे प्रधानमंत्री पर निशाना साध दिया। रॉबर्ट वाड्रा और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम से एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट की पूछताछ का हवाला देते हुए राहुल ने राफेल मामले की जांच की मांग भी कर डाली।


राफेल मुद्दे की गूंज संसद में भी सुनाई दी। लोकसभा में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने राफेल पर जेपीसी की मांग दोहराई। हंगामे के बीच रक्षा मंत्री निर्मला सीतारामन ने भी जवाब दिया। उन्होंने राहुल के आरोपों को झूठा बताया और अखबार को पूरी सच्चाई सामने रखने के लिए कहा। रक्षा मंत्री के बयान पर द हिंदू ग्रुप के चेयरमैन एन राम अपनी सफाई दी और कहा कि उन्हें निर्मला सीतारामन के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है।


राफेल के मामले पर सुप्रीम कोर्ट जांच की मांग को ठुकरा चुका है। सरकार राफेल पर जेपीसी बनाने से इनकार कर चुकी है। लेकिन राफेल पर रह रह कर परतें खुल रही हैं। सवाल ये है कि क्या सरकार राफेल सौदे में कुछ छुपा रही है? या फिर कांग्रेस जो आरोप लगा रही है उनमें दम है? सरकार राफेल की कीमत बता कर इस पूरे विवाद को खत्म क्यों नहीं कर देती? क्या इस मसले को लेकर सिर्फ राजनीति हो रही है। अगर ऐसा है तो राफेल मुद्दे से चुनाव में किसको नुकसान होगा? बीजेपी को या कांग्रेस को, अड्डा की बहस इसी मुद्दे पर आधारित है।