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आवाज़ आंत्र्यप्रेन्योर: लोकस डीप टेक का सफरनामा

प्रकाशित Mon, 29, 2018 पर 10:01  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

त्यौहारों के दिनों में ऑनलाइन रिटेलर्स सेल की रेस में कूदते है और कंज्यूमर भी इसका पूरी तरह से फायदा उठाते है। लेकिन कभी सोचा है इतनी बड़ी तादाद में आएं ऑर्डर्स को ये इ कॉमर्स कंपनियां महज 6 या 7 दिनों में कैसे पूरा करती है? इनके लिए ये मुमकीन बना रहे है स्टार्टअप्स। लाजिस्टिक्स ऑपरेशन को ऑटोमेट और ऑप्टिमाइज करने के पिछे है कटिंग एज टेक्नोलॉजी।


क्या आप जानते है हमारे देश में एक दिन में 10-20 लाख ऑनलाइन सौदे होते है और ये आंकड़ा त्यौहारों के दिनों में हर दिन 50 लाख सौदों तक बढ़ता है। क्योंकी फेस्टिवल तो ई कॉमर्स कंपनियों के कमाई का पीक सीजन होता है। इस साल ई-कॉमर्स के दो बड़े जाएंट कंज्यूमर को  अपनी ओर खिंचने की हर मुमकीन कोशिश में जुटे हुए हमने देखे, आंकडों की माने तो इस साल की दशहरा सेल में अमेजॉन ने करिब 6 हजार करोड़ का कारोबार किया तो फ्लिपकार्ट ने करिब 8 हजार करोड़ का। इतनी बड़ी ऑर्डर्स को पुरा करने की तैयारी इन कंपनियों के पास पहले से होनी जरुरी होती है, क्योंकी ऑर्डर्स पुरा करने से भी ज्यादा चैलेंजिंग होता है उन्हे समय पर पूरा करना, और यहां काम आती है लाजिस्टिक्स में ऑटोमेटेड टेक्नोलॉजी।


नतीश रस्तोगी ने ई-कॉमर्स के बढ़ते कदम परखते हुए यहां पैदा हुई लॉजिस्टीक्स की जरुरतों को समझते हुए लोकस डीप टेक कंपनी शुरू की। इसमें कंज्यूमर के ऑर्डर प्लेस करते ही कंपनी की बैकएंड में पैकेजिंग, शॉर्टिंग, डिलुवरी, ट्रैकिंग की लंबी प्रोसेस चेन होती है। इस सब के लिए मैनपावर और कॉस्ट लगती है और पैसे खर्च करने के बावजूद ग्राहकों को बेहतरीन एक्सपेरिंस देना मुमकीन नही हो पाता है, इस समस्या को सुलझा रही है लोकस का ऑटोमेशन सिस्टम जो एआई, डीप मशीन लर्निंग और जियो कोडिंग के आधार पर बनाया गया है।


कंपनी सिर्फ ऑनलाइन रिटेल कंपनियों के लिए काम नहीं करती इनकी क्लाएंट लिस्ट में ब्लू डार्ट कूरियर कंपनी, अर्बनलैडर जैसा फर्नीचर ब्रैन्ड, बिग बास्केट जैसी ऑनलाइन ग्रोसरी कंपनी से लेकर ड्रापलेट जैसी कंपनियां भी शामिल है जो डायग्नोस्टिक इंडस्ट्री में होम सेंपल कलेक्शन करती है। यानी ऑर्डर एंड डिलिवरी पर आधारित सभी तरह के कारोबारों की लॉजिस्टिक्स को इस टेक्नोलॉजी ने आसान और कॉस्ट इफेक्टिव बनाया है। क्लाएंट के बचे हुए कॉस्ट पर कंपनी परसेंटेज चार्ज करती है और इसी आधार पर कंपनी का रेवेन्यू मॉडल बना है।


कंपनी साल दर साल 500 फीसदी ग्रोथ दर्ज कर रही है और कमाए प्रोफिट का निवेश टेक्नोलॉजी और रिसर्च में लगाया जाता है। फिलहाल फाउंडर्स का पूरा फोकस इंटरनेशनल एक्सपैंशन और रेवेन्यू ग्रोथ पर है। ऑटोमेटेड लास्ट माइल डिलीवरी सिस्टम कंपनियों के लिए ना सिर्फ कॉस्ट इफेक्टिव है बल्की इससे कंजुमर एक्सपीरियंस भी शानदार होता है। एआई मशीन लर्निंग टेक्नोलॉजी के बाद इस स्पेस में जल्द ही ड्रोन्स से डिलिवरी या सेल्फ ड्राइविंग डिलिवरी वेहिकल जैसे कमाल हमें देखने मिलने वाले हैं।