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आवाज़ आंत्रप्रेन्योर: फार्मिंग स्टार्टअप फार्म हार्वेस्ट की कहानी

प्रकाशित Sat, 10, 2018 पर 17:58  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

हमारे देश में 70 फीसदी से अधिक ग्रामीण परिवार कृषि पर निर्भर हैं। कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी है क्योंकि ये क्षेत्र जीडीपी में लगभग 17 फीसदी योगदान देती है और 60 फीसदी से अधिक आबादी को रोजगार यहीं से मिलता है। फिर भी भारत का किसान धक्के खा रहा है, कभी मौसम के तो कभी अधूरी जानकारी से किस्मत की। लेकिन इस सब माहौल को सुधारने में जुटे है स्टार्टअप।


सलेम के राजेश कुमार एक ऐसे आंत्रप्रेन्योर हैं जिन्होंने किसानों को बेहतरीन जिंदगी देने के अपने मकसद को बिजनेस का रुप दिया। तमिलनाडु के किसानों से जुड कर राजेश ने खड़ा किया है फार्मिंग प्रोसेस स्टार्टअप फार्म हार्वेस्ट।


राजेश कुमार ने हमेशा ही जमीन से जुड़ कर काम किए हैं। रियल एस्टेट बिजनेस में लोगों को जमीन मुहैया करवाते हुए राजेश कुमार ने किसानों की परेशानियों को करीब से समझा और इन्हें सुलझाने के लिए 10 साल पहले फार्म हारवेस्ट कंपनी की शुरूआत की। फार्मिंग प्रोसेस को सही से समझने के लिए राजेश ने पहले खुद खेतों में काम किया और फिर फार्म हारवेस्ट का सफर शुरू किया। आज कंपनी तमिलनाडु के स्वीट कॉर्न (मकई) किसानों से जुड़ कर काम करती है। स्वीट कॉर्न के अलावा  राजेश ने फूल गोभी, भिंडी के किसानों के साथ भी काम करने का एक्सपेरीमेंट किया । लेकिन ज्यादा मुनाफा न होने की वजह से सिर्फ स्वीट कॉर्न पर फोकस करना बेहतर समझा।


किसानों को अच्छी फसल और उसकी अच्छी कीमत देने पर कंपनी का खास ध्यान होता है। स्वीट कॉर्न की फसल अच्छी हो इसके लिए कंपनी फसल की बुआई से लेकर काटने तक जरूरी नेतृत्व देती है। किसानों को फसल बीज, खाद और टेक्नोलॉजी मुहैया करवाई जाती है। किसानों को फसल की सही कीमत मिल सके इस पर राजेश खास ध्यान देते है।


कंपनी स्वीट कॉर्न को फ्रेश और प्रोसेस्ड दो तरह से बेचती है और इन्हें छोटी दुकानों के साथ साथ बड़े रिटेलर्स को भी सप्लाई करती है। फ्रेश स्वीट कॉर्न की शेल्फ लाइफ दो दिन होने की वजह से उसे दक्षिण भारत के रिटेलर्स को ही बेचा जाता है। बड़े रिटेलर्स के लिए स्वीट कॉर्न को प्रोसेस कर उसकी शेल्फ लाइफ बढ़ाई जाती है। इसके लिए प्रोडक्ट रिटार्ट प्रोसेस से गुजरते हैं।


कंपनी अपने प्रोडक्ट को गल्फ रिजन, दक्षिण-पूर्व एशिया और श्रीलंका में एक्सपोर्ट भी करती है। अगले 3 साल में कंपनी एक्सपपोर्ट को बढाकर 7-8 देशों तक करना चाहती है। लोगों तक पहुंच बढ़ाने के लिए कंपनी कॉर्न रिटेलिंग के लिए वेंडिंग मशीन का सहारा भी ले रही है। ये मशीन अलग-अलग जगह जैसे मॉल या रिटेल शॉप में मौजूद हैं। इन वेंडिंग मशीन के जरिए  और रिटेलर्स तक सामान पहुंचा कर साथ ही विदेशों में एक्सपोर्ट कर इन सभी माध्यमों के जरीए कंपनी  रेवेन्यू कमाती है।


अब कंपनी पॉपकार्न को भी अपने प्रोजक्ट पोर्टफोलियो में जोड़ना चाहती है। कंपनी रेडी टू ईट पॉपकॉर्न और 2 मिनट में बनने वाले पॉपकॉर्न जैसे प्रोडक्ट शामिल करने पर काम कर रही है। ये रिटेलर्स को सप्लाई किए जाएंगे साथ ही वेंडिंग मशीन के जरिए भी बेचे जाएंगे। इस सेक्टर में विस्तार के लिए कंपनी को गाइडेंस की जरूरत है। ये जरूरी मदद कंपनी को विलग्रो से मिल रही है।  विलग्रो  का साथ कंपनी को देश भर से टेलेंट ढ़ूढ़ने ने और नेटवर्क बढ़ाने में भी मिल रहा है।


फिलहाल कंपनी के साथ करीब 2000 किसान शामिल हैं। साल दर साल  लगभग 40-45 फीसदी की ग्रोथ कंपनी दर्ज कर रही है। आने वाले सालों में 100 फीसदी साल दर साल के बढ़ने का लक्ष्य फाउंडर राजेश कुमारने रखा है। फार्म हारवेस्ट के अलावा ऐग्री सेक्टर में और भी ऐसे कई स्टार्टअप उङर कर आ रहे हैं जो इस क्षेत्र की परेशानिया दूर करने पर काम कर रही है।