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टेलीकॉम कंपनियों को बड़ी राहत

प्रकाशित Thu, 08, 2018 पर 09:28  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

टेलीकॉम कंपनियों को कल सरकार ने बड़ी राहत दी है। कैबिनेट ने फैसला लिया है कि टेलीकॉम कंपनियां अब 25 फीसदी की बजाय 35 फीसदी स्पैक्ट्रम रख सकती हैं। साथ ही उन्हें अब 10 साल की बजाय 16 साल में स्पैक्ट्रम का पैसा चुकाने की छूट दी गई है। इन कंपनियों को अब 700, 800, 900 मेगाहर्ट्ज में 50 फीसदी तक स्पेक्ट्रम रखने की छूट होगी।


इन नए नियमों से अब वोडाफोन-आइडिया को स्पेक्ट्रम सरेंडर नहीं करने होंगे। मर्जर के बाद इनको 5 सर्किल में स्पेक्ट्रम छोड़ने पड़ते। वहीं जियो अब आर-कॉम से स्पेक्ट्रम खरीद सकता है। अब कंपनियों को स्पेक्ट्रम का पैसा चुकाने के लिए ज्यादा वक्त मिलेगा। इससे टेलीकॉम कंपनियों की वित्तीय हालत सुधरेगी, बैंकिंग सेक्टर को भी राहत मिलेगी और बैंकों पर बढ़ते कर्ज का बोझ कम होगा।


इसके अलावा कल हुई कैबिनेट मीट में सरकारी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 5 फीसदी से बढ़कर 7 फीसदी कर दिया गया है और आर्बिट्रेशन प्रोमोशन काउंसिल बनाने को मंजूरी दे दी गई है।


बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता पहली जनवरी से लागू होगा। इससे केंद्र सरकार के मौजूदा 48.41 लाख कर्मचारियों और 61.17 लाख पेंशनधारियों को होगा फायदा होगा। महंगाई भत्ता बढ़ने से चालू कारोबारी साल में 7090.68 करोड़ रु का खर्च होगा। वहीं आर्बिट्रेशन प्रोमोशन काउंसिल बनने से अब 3 लाख रु तक के कारोबारी विवाद भी कमर्शियल कोर्ट में आ सकेंगे। अभी तक 1 करोड़ से ज्यादा के कारोबारी विवाद ही कमर्शियल कोर्ट में आते थे। इस बैठक में मध्यस्ता (मेडिएशन) को कानूनी रूप देने के लिए नियम बनाने का फैसला लेने के साथ ही कमर्शियल कोर्ट (अमेंडमेंट) बिल 2018 लाने का निर्णय भी लिया गया।


कैबिनेट से मिली टेलीकॉम कंपनियों को मिली राहत पर सीओएआई के डीजी राजन मैथ्यू ने कहा कि कैबिनेट के फैसलों से टेलीकॉम सेक्टर को काफी फायदा होगा। स्पेक्ट्रम पेमेंट में वक्त मिलने से राहत मिलेगी। डेडलाइन बढ़ने से कैश फ्लो में मदद मिलेगी। लेकिन डेडलाइन बढ़ना लंबे वक्त के लिए फायदेमंद नहीं होगा। इंडस्ट्री के बुनियादी समस्याओं को अनदेखा किया गया है। लाइसेंस फीस को कम करने की मांग की थी लेकिन उसपर कोई फैसला नहीं लिया गया।