Moneycontrol » समाचार » बाज़ार खबरें

ब्रांड बाजार: श्रीकृष्ण कमिटी के सुझावों का ब्रांड्स पर असर

प्रकाशित Sat, 11, 2018 पर 17:02  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म खुद को व्यक्त करने और दोस्तों से जुड़ने का एक आसान साधन बन गए हैं। बच्चे बेझिझक काफी कुछ पोस्ट कर जाते हैं, लेकिन वो ये नहीं सोच पा रहे हैं कि उनकी पोस्ट की गई तस्वीरों और कमेंट को कोई दूसरा कैसे इस्तेमाल कर रहा है। इसी बात को मॉनिटर करने के लिए जस्टिस श्रीकृष्ण कमिटी ने कुछ सुझाव सामने रखे हैं। जिसमें से एक है कि 18 साल से कम उम्र के बच्चे का डेटा ट्रैक नहीं किया जा सकता। इस सुझाव का क्या असर पड़ेगा गुगल, फेसबुक और स्नैपचैट जैसी बड़ी कंपनियों पर, आइए जानते हैं।


स्नैपचैट, इंस्टाग्राम, फेसबुक और ट्विटर जैसे प्लैटफॉर्म पर बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा है इसीलिए इन प्लैटफॉर्म पर कई विज्ञापनदाता अब ज्यादा ध्यान और खर्चा कर रहे हैं। जिन ब्रांड्स का टार्गेट कंज्यूमर युवा है वो यहां रोज बेहतरीन मौके तलाश रहे हैं। लेकिन जस्टिस श्रीकृष्ण कमिटी के सुझावों के मुताबिक बच्चों का डाटा ट्रैक करना और विज्ञापन के लिए इस डाटा का इस्तेमाल करना जायज नहीं है। अगर ये सुझाव मान लिए जाते हैं तो ना केवल ब्रांड पर असर पड़ेगा, बल्कि ब्रांड के साथ-साथ इन प्लैटफॉर्म के रेवेन्यू को भी झटका लगेगा।


इन सुझावों के मुताबिक किसी भी 18 साल से कम उम्र के बच्चे कि प्रोफाइलिंग करना और उन्हें ट्रैक करना गलत है। सोशल मीडिया और टेक दिग्गजों के साथ-साथ एजुकेशन टेक कंपनियों जैसे कि बेंगलुरू स्थित बायजुज या फिर गेमिंग फर्म पर भी ये बंदिशें और सुझाव लागू होंगे।


बच्चे इंटरनेट पॉप्यूलेशन का सबसे बड़ा हिस्सा हैं। खासकर हमारे देश में ये संख्या और भी बड़ी है क्योंकि देश की 40 फीसदी जनसंख्या 18 साल से कम उम्र की है, पर इंटरनेट पर होना और इस प्लैटफॉर्म के फायदे और उसका दुरुपयोग जानने की समझ ज्यादातर बच्चों में नहीं है।


कई बार डिजिटल वर्ल्ड में डाटा कलेक्शन और प्रोसेसिंग पारदर्शी नहीं होता। कई वेबसाइट और ऐप 13 साल की उम्र के बाद कॉन्ट्रैक्ट साइन करने की अनुमती देते हैं, लेकिन भारतीय कानून के मुताबिक 18 साल से कम उम्र के बच्चे कॉन्ट्रैक्ट नहीं साइन कर सकते। जस्टिस श्रीकृष्ण कमिटी इस बात पर भी जोर दे रहा है। इससे ब्रांड्स के विज्ञापन आय पर असर पड़ सकता है। लेकिन जानकारों का कहना है कि इन माध्यमों पर डायरेक्ट टारगेटिंग छोड़, दूसरे तरीकों से भी बच्चों तक संदेश पहुंचाया जा सकता है।


जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में इन सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स के बिजनेस मॉडल में शिफ्ट कि उम्मीद भी कर सकते हैं। एक एडवर्टाइजमेंट-डिपेंडेंट मॉडल से सब्सिक्रिप्शन मॉडल तक। वहीं ज्यादातर जानकारों का कहना है कि बच्चों कि सुरक्षा से ज्यादा कुछ जरूरी नहीं है। माना जा रहा है कि बच्चों के साथ-साथ वयस्कों के डाटा का गलत इस्तेमाल ना हो इस पर भी आने वाले दिनों में जोर दिया जाएगा।