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Infosys शेयर बायबैक करने की तैयारी में, जानिए निवेशकों और कंपनी के लिए क्या हैं इसके मायने

सरल शब्दों में बायबैक का मतलब होता है कि कंपनी बाजार से अपने ही शेयर खरीदने जा रही है.
अपडेटेड Apr 17, 2021 पर 12:01  |  स्रोत : Moneycontrol.com

इंफोसिस (Infosys) ने कहा है कि वह 1,750 रुपए प्रति शेयर भाव पर अपने 9,200 करोड़ रुपए के शेयर बॉयबैक करेगी। इस बायबैक की ऑफर प्राइस शेयरों की वर्तमान प्राइस से करीब 30 फीसदी ज्यादा है।


इस ऑफर को ध्यान में रखकर यहां यही बताने की कोशिश की जा रही है कि किसी कंपनी और निवेशकों के लिए शेयर बॉयबैक क्या होता है, इसके मायने क्या हैं, इसकी जरूरत क्यों होती है, कंपनी और निवेशकों को इससे क्या फायदा होता है।


बॉयबैक है क्या?


सरल शब्दों में  बॉयबैक का मतलब होता है कि कंपनी बाजार से अपने ही शेयर खरीदने जा रही है। ये प्रक्रिया दो तरीके से सम्पन्न की जाती है। इसके पहले तरीके को ओपन मार्केट रूट (खुले बाजार में खरीदारी) कहा जाता है जिसके तहत कंपनी अपने ही शेयरों को सेकेंडरी मार्केट से खरीदती है। जबकि दूसरे तरीके को टेंडर ऑफर रूट कहा जाता है जिसमें शेयरधार कंपनी की तरफ से रखे गए  ऑफर  के तहत अपने शेयर टेंडर कर सकते हैं।


बॉयबैक को सामान्यतौर पर शेयरधारकों को फायदा पहुचानें या कंपनी की वित्तीय स्थिति को बेहतर बनाने के एक तरीके के तौर पर देखा जाता है। क्योंकि इससे कंपनी के फाइनेंशियल रेश्यो (वित्तीय अनुपातों) में सुधार आता है और कंपनी का वैल्यूएशन बेहतर होता है।


ये कंपनी में उसके प्रोमोटरों के विश्वास को भी बताता है क्योंकि बॉयबैक के बाद कंपनी में प्रोमोटरों की हिस्सेदारी बढ़ती है। प्रोमोटर अपनी हिस्सेदारी तभी बढ़ाना चाहेंगे जब कंपनी का आगे का आउटलुक मजबूत हो। बता दें कि बॉयबैक में खरीदे गए या टेंडर किए गए शेयर रद्द (extinguishe) कर दिए जाते हैं और आउट स्टैडिंग शेयरों की कुल संख्या कम हो जाती है।


Buyback offer के निवेशकों के लिए क्या हैं मायने ?


शेयर बाजार (Stock markets) सामान्यतौर पर बॉयबैक ऑफर को सकारात्मक तौर पर लेता है। बाजार ये मानकर चलता है कि जिन प्रमोटरों को इस बात का भरोसा होता है कि उनकी कंपनी मजबूत है और आगे भी उसके कारोबार में ग्रोथ जारी रहेगी वही बॉयबैक लाने का विकल्प अपनाते हैं। इस बात के साक्ष्य भी हैं कि buyback ऑफर के बाद शेयरों में बढ़ोत्तरी होती है।


बॉयबैक से कंपनी के वैल्यूएशन में भी सुधार होता है। ये देखने को मिला है कि बॉयबैक ऑफर के बाद अर्निंग प्रति शेयर (EPS), रिटर्न ऑन कैपिटल (return on capital) और रिटर्न ऑन नेटवर्थ ( return on net worth) जैसे अहम अनुपातों (रेश्यो) में सुधार आया है।


सबसे अहम बात ये है कि शेयर बॉयबैक ऑफर चाहे टेंडर रूट से लाया गया हो या ओपन मार्केट रूट से शेयर धारकों को हरहाल में फायदा होता है। इसके अलावा चूंकि शेयर बॉयबैक प्रस्ताव बाजार भाव से प्रीमियम पर लाए जाते हैं इसलिए ऑफर प्राइज कई मायनों में बेंचमार्क बन जाते हैं। Infosys के बॉयबैक के मामले में इसका ऑफर प्राइस शेयर के बाजार भाव से 29 फीसदी ज्यादा या प्रीमियम पर है।


Buyback offer के निवेशकों के लिए क्या हैं मायने ?


बॉयबैक के जरिए कंपनी पर प्रोमोटर्स की होल्ड या पकड़ और मजबूत हो जाती है क्योंकि बॉयबैक के बाद कुल आउटस्टैंडिंग शेयरों की संख्या कम हो जाती है।


इसका महत्व उस समय समझ में आता है जब किसी कंपनी को होस्टाइल तरीके (जबरन) से अधिग्रहित करने की कोशिश होती है क्योंकि जिस कंपनी में प्रोमोटरों का होल्डिंग ज्यादा होती है उसका होस्टाइल एक्वीजीशन करना मुश्किल होता है।


इसके अलावा बॉयबैक कंपनी को निवेशकों के बीच ज्यादा लोकप्रिय बनाता है। इसकी वजह ये है कि  buyback निवेशकों को फायदा पहुचाने का ज्यादा टैक्स इफिसिएंट (tax-efficient) तरीका होता है। इसका मतलब ये है कि बॉयबैक के जरिए मिलने वाली राशि पर लागू टैक्स की दर डिविडेंड से मिलने वाली राशि पर लागू टैक्स की दर से कम होती है। बता दें की डिविडेंड में  तीन स्तरों पर टैक्स चुकाना होता है।


इसके अलावा बॉयबैक किसी कंपनी की पूंजी घटाने का आसाना और जल्दी से पूरा होने वाला तरीका है। समान्य तरीके से पूंजी घटाने के लिए किसी कंपनी को National Company Law Tribunal (NCLT) से अनुमति लेनी होती है।


इसके अलावा कंपनियां मंदी और बाजार के उतार-चढ़ाव की स्थिति में अपने शेयर प्राइस को सपोर्ट देनें के लिए भी  बॉयबैक तरीका अपनाती हैं।


 कंपनियों और निवेशकों के लिए बॉयबैक की ऊपर बताई गई अहमियत के अलावा कुछ और भी ऐसे कारण हैं जिनकी वजह से बाजार बॉयबैक को सकारात्मक नजरिए से देखता है।


बॉयबैक के जरिए कंपनियां अपने सरप्लस कैश को उपयोग में ला सकती हैं। शेयर होल्डर्स के फंड को कंपनी के ऊपर अतिरिक्त उत्तरदायित्व समझा जाता है। बॉयबैक के जरिए शेयरधारकों के फंड में होने वाली कमी से लिस्टेड कंपनी के ओवरऑल दायित्व में कमी आती है। जिससे उसका बैलेंस सीट मजबूत होता है।


बॉयबैक को कोई बेहतर अधिग्रहण का मौका न होने और दूसरे विकल्प न होने पर कंपनियों के लिए सरप्लस फंड को उपयोग में लाने का सबसे बेहतर तरीका समझा जाता है। यही वजह है कि वर्तमान में 10 से ज्यादा बॉयबैक ऑफर चालू हैं। इसमें HPCL, Jagran Prakashan, NIIT, Rane Braking, Aarti Drugs और Gujarat Apollo Industries के बॉयबैक शामिल हैं।


बॉयबैक की लोकप्रियता का आलम यह है कि 2020-21 में 35,000 करोड़ रुपये के कुल 61 बॉयबैक ऑफर आए। सिर्फ साल 2021 के शुरुआती 3 महीनों में हमको 2,000 करोड़ रुपये के 16 बॉयबैक ऑफर देखने को मिले।


इन्फोसिस के शेयर धारकों के लिए बॉयबैक ऑफर के क्या हैं मायने 


इन्फोसिस ओपन मार्केट रूप से अधिकतम करीब 5.3 करोड इक्विटी शेयरों का बॉयैबक करेगी जो उसके पेड-अप कैपिटल के 1.23 फीसदी हैं। इसका मतलब ये है कि कंपनी के वर्तमान शेयर धारक इस ऑफर में सीधे अपने शेयर टेंडर नहीं कर पाएंगे। लेकिन इस बॉयबैक ऑफर से कंपनी के शेयर धारकों को अप्रत्यक्ष फायदा होगा क्योंकि कंपनी द्वारा करीब 30 फीसदी प्रीमियम यानी 1,750 रुपये प्रति शेयर के भाव पर रखे गए इस ऑफर से बाजार के सेंटीमेंट को बूस्ट मिलेगा। जिससे सेकेंड्री मार्केट में शेयरों के भाव में बढ़त देखने को मिलेगी और शेयर धारक अप्रत्यक्ष रूप से इसका लाभ हासिल करेंगे। कंपनी की बॉयबैक कमेटी उस तरीके और फ्रिक्वेंसी का निर्धारण करेगी जिसके आधार पर बाजार से शेयरों का बॉयबैक किया जाएगा।


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