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नए फॉर्मूले से यूपीए के दौर की जीडीपी की गणना

प्रकाशित Thu, 29, 2018 पर 10:43  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सरकार ने बदले हुए तरीके से यूपीए के समय की जीडीपी को फिर से कैलकुलेट किया है। नए फॉर्मूले से पुरानी जीडीपी की गिनती में यूपीए सरकार के समय की जीडीपी दरें घट गई हैं। मसलन नए फॉर्मूले में साल 2010-11 में जीडीपी 8.5 फीसदी थी जबकि पुरानी जीडीपी 10.3 फीसदी थी। नीति आयोग का कहना है कि अब जिस फॉर्मूले से जीडीपी को मापा गया है वो इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के हिसाब से है।


सरकार के मुताबिक पुराने बेस ईयर (2004-05) के मुताबिक साल 2010-11 में अर्थव्यवस्था की विकास दर 10.3 फीसदी दर्ज की गई थी लेकिन अब नए बेस ईयर (2011-12) के मुताबिक दरअसल 8.5 फीसदी ही थी। सरकार ने बैक सीरीज के मुताबिक अर्थव्यवस्था के विकास दर के आंकड़े जारी किए हैं। नए सीरीज के मुताबिक 2015-16 में विकास दर 8.2 फीसदी थी जो 2016-17 में 7.1 फीसदी और 2017-18 में 6.2 फीसदी हो गई। यानी 2016 के बाद करीब 1.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इससे आशंका जताई जा रही है ये नोटबन्दी का असर हो सकता है लेकिन नीति आयोग ने इसका खंडन किया है।


नीति आयोग और सांख्यकी मंत्रालय ने जीडीपी गणना के नए बेस ईयर 2011-12 के मुताबिक यूपीए सरकार के 2005-06 से लेकर 2010-11 तक का जीडीपी का आंकड़ा जारी किया। इन आंकड़ों के मुताबिक  पुराने बेस ईयर (2004-05) के मुताबिक साल 2010-11 जो विकास दर 10.3 फीसदी दर्ज की गई थी वो दरअसल नए बेस ईयर (2011-12) के मुताबिक 8.5 फीसदी ही थी।


इन आंकड़ों को लेकर नीति आयोग के वीसी राजीव कुमार ने  कहा कि नए बेस ईयर में बढ़े हुए कीमतों पर जीडीपी के आंकड़े तय किये गए हैं। पुराने बेस ईयर में कीमतें स्थिर थीं। नई जीडीपी सीरीज अब 2011-12 के बेस ईयर के आधार पर होगी। नया मेथड ज्यादा वैज्ञानिक है और दुनिया भर में इसका इस्तेमाल होता है।