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सशक्त की सफलता पर संदेह!

प्रकाशित Wed, 11, 2018 पर 11:22  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

डूबते हुए कर्ज यानी एनपीए से निपटने के लिए शुरू की गई खास पहल सशक्त की सफलता को लेकर वित्त मंत्रालय को ही संदेह हो रहा है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक इस योजना से बैंकों पर बोझ घटने की बजाय बढ़ सकता है।


सूत्रों का कहना है कि वित्त मंत्रालय के कई अधिकारियों को सशक्त की सफलता को लेकर संदेह है। सशक्त के प्रस्ताव से वित्त मंत्रालय के कई अधिकारी सहमत नहीं हैं। वित्त मंत्रालय के अधिकारियों की दलील है कि एनसीएलटी के जरिए डूबे कर्ज से वसूली पर फोकस करना चाहिए।


सूत्रों के मुताबिक वित्त मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि सशक्त के तहत एआईएफ यानि ऑल्टरनेट इन्वेस्टमेंट फंड बनाने का प्रावधान है। हालांकि एआईएफ बनाने के लिए बैंकों को अतिरिक्त पूंजी की जरूरत होगी। लिहाजा बैंकों पर एआईएफ बनाने का दबाव है, लेकिन इससे बोझ बढ़ने की संभावना है। कई सरकारी बैंक एआईएफ बनाने को लेकर उत्साहित नहीं हैं। निजी कंपनियां भी एआईएफ में पूंजी डालने पर उत्साहित नहीं हैं।


सूत्रों की मानें तो वित्त मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि कई बड़े लोन खाते एआईएफ बनने से पहले एनसीएलटी में पहुंच जाएंगे। आरबीआई की ओर से तय समय सीमा के तहत उन्हें एनसीएलटी में भेजना होगा। मेहता कमिटी के प्रस्ताव की गहराई से समीक्षा के बाद फैसला करना चाहिए था।