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गलवान वैली झड़प के 3 दिन बाद चीन ने 10 भारतीय सैनिकों और 2 अधिकारियों को छोड़ा

मामले पर नजदीकी से नजर रखने वाले लोगों के मुताबिक चीन की सेना ने 3 दिन के बातचीत के बाद गरुवार की शाम को 10 भारतीय सैनिको सहित सेना के 2 मैजेर रेंक के अधिकारियों को मुक्त कर दिया है।
अपडेटेड Jun 20, 2020 पर 10:52  |  स्रोत : Moneycontrol.com

भारतीय सेना ने गुरुवार की शाम को कहा था कि चीन की सेना के साथ गलवान में हुई झड़प में शामिल सभी भारतीय सैनिक की गणना हो गई है।


मामले पर नजदीकी से नजर रखने वाले लोगों के मुताबिक चीन की सेना ने 3 दिन के बातचीत के बाद गुरुवार की शाम को 10 भारतीय सैनिकों सहित सेना के 2 मैजेर रेंक के अधिकारियों को मुक्त कर दिया है। हालांकि इस मुद्दे पर सेना की तरफ से आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है।


सेना ने गुरुवार को दिए गए अपने बयान में  कहा था कि इस कार्रवाई में कोई भारतीय सैनिक लापता नहीं है। हालांकि सेना की तरफ से इस तरह का कोई बयान नहीं जारी किया गया है कि कोई जवान बंधक बनाया गया था या नहीं लेकिन पीटीआई के मुताबिक चीनी सेना ने 2 मेजर सहित 10 जवानों को बंधक बनाया था जिन्हें 3 दिन बाद रिहा कर लिया गया है।


इससे पहले जुलाई 1962 में चीनी सेना ने भारतीय सैनिकों को बंदी बनाया था। गलवान घाटी  में हुए युद्ध के दौरान करीब 30 भारतीय जवान शहीद हुए थे और दर्जनों जवानों को चीनियों ने पकड़ लिया था जिन्हें बाद में रिहा कराया गया था।


सेना के सूत्रों ने कहा है कि मंगलवार को हुई इस खूनी झड़प में 76 आर्मी के जवानों पर चाइनीज सेना द्वारा हमला किया गया जिसमें से 18 गंभीर रुप से घायल हुए और 58 लोगों को हल्की चोटें आई। सेना के इस बयान में आगे कहा गया है कि इनमें से 18 लोगों का इलाज लेह के अस्पताल में चल रहा है जबकि 58 दूसरे अलग- अलग अस्पतालों में भर्ती हैं।


गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिको के बीच हुई यह खूनी झड़प नाथू ला में 1967 के बाद हुई सबसे बड़ी झड़प है। नाथू ला में हुई झड़प में भारत ने लगभग 80 जवान गवांए थे। वहीं चीन के लगभग 300 जवानों को जान गवांनी पड़ी थी।


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