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फोन देना मजबूरी तो कंट्रोल भी जरूरी, कैसे बनाएं बच्चे के मोबाइल पर आपका कंट्रोल

Google का पैरेंटल कंट्रोल ऐप से बच्चे के स्क्रीन टाइम पर कंट्रोल किया जा सकता है।
अपडेटेड Sep 22, 2019 पर 13:44  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

बच्चे होशियार ! क्योंकि मम्मी देख रही है। ये संदेश उन बच्चों के लिए है जिनके पास स्मार्टफोन है। यानी मोटे तौर पर लगभग सभी बच्चों के लिए। क्योंकि अब आपके पास गूगल का फैमिली लिंक ऐप - एक नए अवतार में है। अब आप ना सिर्फ बच्चों के स्क्रीन टाइम यानि मोबाइल पर बिताए गए समय को कंट्रोल कर सकते हैं।


आप एक-एक ऐप के लिए टाइम फिक्स कर सकते हैं। यानी जरूरी नहीं कि बच्चे का फोन बंद या लॉक कर दिया जाए और वो आपको कॉल ना कर सके या एसएमएस ना करे सके। अब आप उन्हीं ऐप्स की टाइम लिमिट सेट कर सकते हैं, जिनपर कंट्रोल जरूरी है। बाकी का फोन आराम से काम करेगा। इस खबर के साथ आज सीएनबीसी-आवाज़ आपको पैरेंटल कंट्रोल के स्मार्ट टिप्स बताने जा रहा है।


Google फैमिली लिंक


Google का पैरेंटल कंट्रोल ऐप से बच्चे के स्क्रीन टाइम पर कंट्रोल किया जा सकता है। इससे हर ऐप को कंट्रोल कर सकते हैं। इसके लिए फोन बंद करने की मजबूरी नहीं होती है। इसकी सहायता से स्क्रीन टाइम घटा-बढ़ा भी सकते हैं। यह एंड्रॉयड 10 के साथ बिल्ट इन ऐप है। दूसरे एंड्रॉयड में डाउनलोड कर सकते हैं।


इसमें ऐप के लिए बेड टाइम, ट्रैक एक्टिविटी भी है। ऐप के लिए डेली लिमिट भी संभव है। मैप पर लोकेशन देख सकते हैं। यह एप लॉक होने से पहले बच्चे को एलर्ट करता है। 15, 5 और 1 मिनट पहले एलर्ट देता है।


माता-पिता के लिए टिप्स


आप सोशल मीडिया मेंटॉर बनें, मॉनिटर नहीं। आजकल टेक्नोलॉजी जरूरी भी है। बच्चा कब क्या करता है, इसकी जानकारी रखें। बच्चे को अपने कंट्रोल में सबकुछ दें।  WiFi है तो नियम से चलाएं, समय-समय पर बंद करें। नियम बनाएं तो कठोरता से पालन करें। पैरेंटल कंट्रोल ऐप का इस्तेमाल करें।


स्क्रीन टाइम पर ध्यान दें


किसी स्क्रीन के सामने बिता हुआ समय देखें। स्मार्टफोन, TV, कंप्यूटर, गेम के स्क्रीन देखें। आंख और दिमाग की सेहत से संबंध बताएं। कंट्रोल से रहें तो बहुत फायदेमंद होता है। बच्चों को ज्यादा स्क्रीन टाइम से खतरा हो सकता है। बहुत कम स्क्रीन टाइम से भी दिक्कत हो सकती है।


ज्यादा स्क्रीन टाइम से खतरा


ज्यादा स्क्रीन टाइम से वजन बढ़ना, खाने-पीने में गड़बड़ी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। इसके अलावा डिप्रेशन, आलस, नींद की कमी का शिकार भी हो सकते हैं। अनुचित, गैरजरूरी सामग्री से सामना भी हो सकता है।


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