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टेलीकॉम रेगुलेटर TRAI का कंसल्टेशन पेपर, IUC को जारी रखने का विरोध

इंटरकनेक्ट यूज़ेस चार्ज को जारी रखने पर ट्राई के कंस्लटेशन पेपर का अधिकतर स्टेकहोल्डर्स ने विरोध किया है
अपडेटेड Oct 22, 2019 पर 10:25  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

इंटरकनेक्ट यूज़ेस चार्ज को 1 जनवरी के बाद जारी रखने पर ट्राई के कंसल्टेशन पेपर का अधिकतर स्टेकहोल्डर्स ने विरोध किया है। कंपनियों के मुताबिक इससे प्रधानमंत्री मोदी की महत्वकांशी योजना डिजिटल इंडिया को झटका लग सकता है। इसे जारी रखने से गाहकों पर ज्यादा बोझ पड़ेगा। साथ ही निवशकों को भरोसा भारतीय बाज़ार पर कम होगा। इस पर रिलायंस जिओ की तरफ से कहा गया है कि इंटरकनेक्ट यूज़ेस चार्ज को जारी रखने से डिजिटल इंडिया को झटका लग सकता है।


इससे ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। निवेशकों का भारतीय बाज़ार पर भरोसा भी कम होगा। कॉल दर मुफ्त नहीं रहने से गरीबों पर असर पड़ेगा। इंटरकनेक्ट यूज़ेस चार्ज के जारी रखना सही तरीका नहीं है। इससे मोबाइल ग्राहक डिजिटल इंडिया के फायदे से वचिंत होंगे। इंटरकनेक्ट यूज़ेस चार्ज को जारी रखने से पुराने ऑपरेटर्स को फाय़दा होगा।


बता दें कि इंटरकनेक्ट यूज़ेस चार्ज को 1 जनवरी के बाद जारी रखने पर ट्राई ने कंस्लटेशन पेपर जारी किया था। 18 अक्टूबर इस पर कमेंट देने की आखिरी तारीख़ थी। फिलहाल IUC चार्ज 6 पैसा है। 1 जनवरी 2020 से इसे पूरी तरह के खत्म होना है लेकिन ट्राई इसे जारी रखना चाहता है।


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