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कंज्यूमर अड्डाः गाड़ी या मोबाइल कोई एक ही चलाएं

प्रकाशित Thu, 25, 2019 पर 18:14  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

न तेज रफ्तार कार, न कोई हेवी ट्रैफिक का रश, न ही कोई मेन सड़क। रिहायशी इलाके की शांत सर्विस रोड पर एक तीन साल का बच्चा अपने ही परिजन के कार के नीचे आकर दम तोड़ देता है। जो शख्स बच्चे को ड्रॉप कर रहा था वो अपने मोबाइल फोन पर व्यस्त था इतना व्यस्त की उसे बच्चे के कुचले जाने तक का पता नहीं चला। बड़ी आसानी से ड्राइवर को दोषी करार दिया जा सकता है। गैर जिम्मेदाराना बोल देंगे लेकिन साथ ही में जरूरी है कि खुद अपने आप को देखें और अपने आस पास भी देखें। हमें मोबाइल फोन की लत लग गई है। मोबाइल फोन से न आंख हटती है न कान और न ही दिमाग और मोबाइल फोन का ये फितूर बन सकता है जानलेवा।


एक हाथ में स्टीयरिंग और दूसरे में मोबाइल लोगों को ऐसी ड्राइविंग करते हुए आपने जरूर देखा होगा। लेकिन गाड़ी चलाने के दौरान मोबाइल का इस्तेमाल करने से रोड एक्सिडेंट का खतरा बढ़ जाता हैं। दिल्ली में तीन साल के एक बच्चे को उसके चाचा ने गाड़ी से घर छोड़ा और वो फोन पर बात करने लगा। युवक को लगा कि बच्चा रास्ता पार कर गया है, लेकिन बच्चा गाड़ी की चपेट में आ गया और करीब 20 मीटर तक घिसता चला गया। जिसकी एम्स में मौत हो गई।


विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने एक रिपोर्ट जारी है की है। रिपोर्ट के मुताबिक अगर आप गाड़ी चलाते समय मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं तो एक्सिडेंट का खतरा 4 गुना तक बढ़ जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक मैसेज टाइप करते हुए ड्राइविंग करने के दौरान व्यक्ति हर 6 सेकेंड में 4.6 सेकंड के लिए अपनी आंखें सड़क से हटा लेता है। इसका मतलब अगर आपकी स्पीड करीब 80 किलोमीटर प्रति घंटे के हिसाब से है, तो इतने सेकेंड में आप एक फुलबॉल मैदान के बराबर की दूरी तय कर लेते हैं।


भारत सरकार ने सड़क दुर्घटना में मरने वाले और घायलों का आंकड़ा भी जारी किया था। रिपोर्ट के मुताबिक साल 2016 में मोबाइल चलाते वक्त हुए सड़क दुर्घटना में मरने वालों की संख्या 2,138 थी। जबकि 4,746 लोग घायल हुए थे। वहीं साल 2017 में मौत का आंकड़ा बढ़कर 3,172 हो गया, जबकि घायलों की संख्या 7, 830 तक पहुंच गई। ये आंकड़ा साल दर साल बढ़ता ही जा रहा है। लेकिन सवाल ये है कि आखिर लोगों खुद और दूसरो की जिंदगी खतरे में डाल कर ऐसी आदत को क्यों नहीं बदल रहे हैं।