Moneycontrol » समाचार » बाज़ार खबरें

डिजिटल ठगी से बचकर रहें, सावधानी और जानकारी ही बचाव !

ऑनलाइन ठगी के हजार तरीके निकल चुके हैं और निकलते जा रहे हैं।
अपडेटेड Aug 09, 2019 पर 12:48  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

डिजिटल और ऑनलाइन ये कुछ ऐसी बातें हैं चीजें हैं जिनसे लगता है कि दुनिया आपकी मुट्ठी में है। ऑनलाइन होते ही आप दुनिया भर से कनेक्ट हो जाते हैं। कमाने, बचाने, जमा करने से लेकर खर्च करने तक के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं। लेकिन याद रहे यहां सावधानी हटी तो ठगे या लुटे जाने के लिए भी कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। खड़े-खड़े लुट जाएंगे और लुटेरों का नाम निशान तक नहीं मिलेगा। दरअसल, ऑनलाइन ठगी के बारे में अब किसी को कुछ बताने की जरूरत नहीं। ऑनलाइन ठगी के हजार तरीके निकल चुके हैं और निकलते जा रहे हैं। मगर सबसे घातक है बैंक अकाउंट या क्रेडिट कार्ड में लगने वाली चपत। आज इसी पर चर्चा करेंगे, क्योंकि अब VVIP लोग भी इसका शिकार हो रहे हैं।


पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की पत्नी और पटियाला की सांसद परनीत कौर से 23 लाख की ठगी। मगर इसे आप परनीत कौर की मासूमियत कहेंगे या अति आत्मविश्वास कि ठगों ने उनको फोन पर रखकर बैंक खाते, ATM कार्ड और OTP तक ले ली। ठग कह रहा था कि वो SBI का ब्रांच मैनेजर है और उनकी सैलरी तुरंत क्रेडिट करने के लिए ये जानकारियां चाहिए। मामला एक सांसद और मुख्यमंत्री की पत्नी का था इसलिए दिल्ली, चंडीगढ़, पटियाला की पुलिस एक्टिव हो गई और झारखंड के जामताड़ा में बैठे आरोपी को पकड़ लिया गया। लेकिन ये समस्या अब आम हो चुकी है और आम आदमी के लिए इतना तेज एक्शन शायद ही कभी होता हो?


कैसे होती है ठगी?


ठग बैंक अधिकारी बनकर फोन करते हैं। फोन पर अकाउंट से संबंधित झांसा देते हैं। ये KYC, लोन, लॉटरी कुछ भी झांसा दे सकते हैं। बातचीत में अकाउंट की जानकारियां लेते हैं। जानकारियां मिलते ही ट्रांजैक्शन शुरू करते हैं। फोन रखते-रखते साइबर ठगी हो चुकी होती है।


किस-किस चीज पर चोरों की नजर?


बैंक अकाउंट के ऑनलाइन डिटेल से ठगी होती है। साइबर ठग ऑनलाइन ID, पासवर्ड मांगते हैं। अकाउंट नंबर और ATM PIN से भी ठगी होती है। ATM कार्ड, CVV नंबर से भी ऑनलाइन ठगी संभव है। DEBIT कार्ड और OTP मांगकर भी पैसे उड़ाए जाते हैं। क्रेडिट कार्ड डिटेल के जरिए ठगी और आसान होती है। अपको नाम, जन्म की तारीख जैसी जानकारियां भी बचानी चाहिए।


ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड से बचाव


अपने अकाउंट की नियमित जांच करते रहें। कोई भी गड़बड़ी दिखे तो तुरंत बैंक को बताएं। अपना PIN और पासवर्ड पर गोपनीयता रखें। ऑनलाइन बैंकिंग के लिए स्ट्रॉन्ग पासवर्ड रखें। पासवर्ड में ALPHABET, नंबर, सिंबल मिले हुए होने चाहिए। समय-समय पर पासवर्ड बदलने की आदत डालें। फोन पर किसी को अकाउंट का डिटेल ना दें। ध्यान रखें कि बैंक, वित्तीय संस्थाएं अकाउंट डिटेल नहीं मांगती। Email पर किसी को भी अकाउंट डिटेल ना भेजें। Email में आए अनजान लिंक पर क्लिक ना करें। Email में फालतू मेल आने पर ब्लॉक करें। कंप्यूटर में एंटी वायरस, फायरवॉल रखा करें। पब्लिक कंप्यूटर पर ऑनलाइन बैंकिंग ना करें। पब्लिक नेटवर्क पर भी ऑनलाइन बैंकिंग नहीं करें। https वाले सिक्योर कनेक्शन का प्रयोग करें। क्रेडिट, डेबिट कार्ड खो जाए तो तुरंत रिपोर्ट करें। ATM का इस्तेमाल करते वक्त चौकन्ना रहा करें। ATM की रसीद को वहां कूड़ेदान में ना डालें। संवेदनशील कागज रद्दी हो तो फाड़ कर फेंके। चेक के साथ ज्यादा जानकारी शेयर होती है।


धोखा हो जाने पर क्या करें?


फ्रॉड का पता लगते ही बैंक को सूचना दें। ATM कार्ड ब्लॉक कराएं, इंटरनेट बैंकिंग का पासवर्ड बदलें। बैंक से की गई कंप्लेन नंबर, SMS सुरक्षित रखें। पुलिस की साइबर क्राइम सेल को तुरंत संपर्क करें। 30 दिन में बैंक से मदद ना मिलने पर बैंकिंग लोकपाल से मिलें। बैंक के प्रशासनिक शिकायत जांच अधिकारी से शिकायत करें। RBI के डिप्टी गवर्नर को भी शिकायत भेज सकते हैं।


बैंक फ्रॉड पर ग्राहकों को बड़ी राहत


डिजिटल बैंक फ्रॉड पर ग्राहकों को राहत मिली है। आप 3 दिन के भीतर बैंक को फ्रॉड की जानकारी दे सकते हैं। ऐसा होने पर बैंक फ्रॉड की रकम की भरपाई करेंगे। 4 से 7 दिन में जानकारी दी है तो पूरी भरपाई नहीं होगी। ऐसी स्थिति में बैंक सिर्फ 25,000 रुपये तक की भरपाई करेंगे। 7 दिन के बाद जानकारी देने पर भरपाई बैंक पर निर्भर करेगी।


किस सूरत में मिलेगा पैसा?


अगर बैंक के किसी कर्मचारी की गलती हो। पूरी तरह से बैंक के सिस्टम की गलती हो। ऑनलॉइन फ्रॉड की जानकारी बैंक को 2-3 दिन में दे दी गई हो।


कब होगी ग्राहक की गलती


7 दिन के अंदर फ्रॉड की जानकारी नहीं देने पर। ऐसे में बैंक बोर्ड ये तय करेगा कि पैसे देने हैं या नहीं।