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कंज्यूमर अड्डा: मॉडल किराया कानून जल्द, जानें किसे होगा फायदा!

प्रकाशित Fri, 12, 2019 पर 08:53  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

अगले महीने यानी अगस्त में सरकार नया किराया कानून लेकर आ रही है। इसके बाद देश में जल्द मकान और दुकान किराये पर लेना-देना और आसान हो जाएगा। इस कानून का ड्राफ्ट लोगों की राय के लिए पब्लिक डोमेन में है। यानी हम और आप भी इस पर अपनी राय दे सकते हैं। राज्य सरकारों को भी सुझावों के लिए इस ड्राफ्ट को भेजा गया है। प्रॉपर्टी चुंकि स्टेट सब्जेक्ट है इसलिए राज्यों की मंजूरी जरूरी हो जाती है, क्योंकि केंद्र सरकार का मॉडल किराया कानून राज्यों को ही लागू करना है। नए किराया कानून के पीछे केंद्र सरकार का क्या मकसद है और इससे किस-किसको फायदा होगा।


किराये पर नया कानून जल्द आएगा। पर अचानक इसकी जरूरत क्यों पड़ी है। दरअसल जहां एक तरफ शहरों में का लाखों मकान खाली पड़े हैं, वहीं दूसरी ओर लाखों लोग बेघर हैं या सस्ता घर ढूंढ रहे हैं। इससे दूसरा नुकसान ये होता है कि बाजार में मकानों की एक बनावटी कमी पैदा हो जाती है और किराये अव्यवहारिक रूप से बढ़ जाते हैं। लेकिन अपने आप में ये पूरा सच भी नहीं है। मुंबई जैसे शहरों को छोड़ दें तो देश के बहुत से इलाकों में लोग अपनी प्रॉपर्टी किराये पर देने से डरते भी हैं। उन्हें लगता है कि कहीं मकान ही हाथ से न चला जाए, यानी किरायेदार प्रॉपर्टी पर कब्जा न कर ले।


प्रस्तावित कानून में किरायेदार और मकानमालिक दोनों के हितों का ख्याल रखा गया है। मसलन किरायेदार से तीन महीने के किराए से ज्यादा की सिक्योरिटी नहीं ली जाएगी। मकान के रेनोवेशन के बाद ही किराया बढ़ सकता है। मकान मालिक को कभी प्रॉपर्टी देखनी हो तो 1 दिन पहले नोटिस देकर आएगा।


मकान छोड़ने के 1 महीन के अंदर सिक्योरिटी की रकम वापस करनी होगी। और तो और विवाद निपटारे के लिए स्पेशल किराया ट्रिब्यूनल बनेगा। उधर मकानमालिक को किराये को एक वक्त के बाद बढ़ाने या घटाने की छूट होगी। उसके लिए प्रॉपर्टी को खाली कराना भी आसान होगा यानी उसे बेवजह की कानूनी लड़ाई और इसके डर से छुटकारा मिलेगा।