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कंज्यूमर अड्डाः ऑनलाइन शॉपिंग, बड़े डिस्काउंट के दिन लदे!

प्रकाशित Fri, 08, 2019 पर 07:49  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

अमेजॉन, फ्लिपकार्ट पर बड़े-बड़े डिस्काउंट के दिन लद गए। सरकार ने ई-कॉमर्स के लिए फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट यानि एफडीआई के जो नियम लागू कर दिए हैं, उनसे इन कंपनियों के हाथ बंध गए हैं। बड़ी पूंजी के दम पर ये लोग जिस तरीके से रिटेल कारोबार को बदलने में लगे थे, उसमें बड़ा ब्रेकर खड़ा हो गया है। सरकार का तर्क है कि नए नियमों से ऑनलाइन और ऑफलाइन रिटेल में बराबरी की प्रतियोगिता का माहौल बनेगा।


अब इतने दबाव में ऑनलाइन कंपनियां पहले जैसा डिस्काउंट, फ्री-फास्ट डिलिवरी और कैशबैक जैसी सुविधाएं देने से रहीं। हमारे ऑफलाइन रिटेलर तो खुश हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि ग्राहक यानि हम और आप घाटे में रहेंगे। क्या वाकई हम घाटे में रहेंगे या फिर लाखों-करोड़ फूंक चुकी ये कंपनियां कोई रास्ता निकाल लेंगी और घर बैठे सस्ता सामान मिलता रहेगा। कंज्यूमर अड्डा का बड़ा सवाल यही है।


रिटेलरों का विरोध प्रदर्शन और सरकार पर दबाव रंग लाया और सरकार ने ई-कॉमर्स में एफडीआई के नए नियम लागू कर दिए। इसका सीधा असर अमेजॉन और फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियों पर पड़ेगा, जिनमें लाखों करोड़ रुपए का विदेशी निवेश है, पर पड़ेगा। नए नियमों के मुताबिक अब ये कंपनियां बड़े बड़े डिस्काउंट नहीं दे पाएंगी क्योंकि जिन रास्तों से अपने लिए सस्ता प्रोडक्ट खरीदती और बेचती थीं, वो बंद हो गए।


ये कंपनियां भारी मात्रा में कम कीमत पर सामान खरीदती थीं और खुद एक सेलर कंपनी बनाकर वो सामान बेचती थीं। इस तरह जो बचत होती थी उसे बतौर डिस्काउंट ग्राहक को पास करती थीं। लेकिन अब वो अपने प्लैटफॉर्म पर अपने ही सेलर का माल नहीं बेच पाएंगी। यही नहीं अब वो एक चौथाई से ज्यादा माल किसी भी एक सेलर से नहीं ले पाएंगी।


साफ है कि उनकी बचत खत्म हो जाएगी तो वो डिस्काउंट भी नहीं दे पाएंगी या फिर कम देंगी। इसके अलावा इसी बचत के दम पर वो फ्री डिलिवरी, फास्ट डिलिवरी, रिटर्न, कैशबैक जैसी सुविधाएं भी देती थीं। अब नियम ये है कि ये सुविधाएं देनी है तो सारे सेलर्स को देनी होगी।


मतलब साफ है कि कोई रास्ता नहीं निकला तो ऑनलाइन शॉपिंग में डिस्काउंट, फ्री डिलिवरी जैसी सुविधाएं खत्म हो सकती हैं। मगर कंपनियों ने इसका रास्ते भी खोजने शुरू कर दिये हैं। अमेजॉन ने क्लाउडटेल में हिस्सा 49% से घटाकर 24% किया। अमेजॉन ने अपनी सेलर कंपनी क्लाउडटेल में अपना हिस्सा घटा दिया है और क्लाउडटेल फिर से अमेजॉन पर आ चुका है।


फ्लिपकार्ट भी ऐसा कोई रास्ता निकाल सकती है। सरकार ने ऑनलाइन-ऑफलाइन के बीच बराबरी को बढ़ावा देने के लिए नियम बनाए हैं, लेकिन  सवाल ये है कि रोजमर्रा के लिए रिटेल पर निर्भर कंज्यूमर इस उठापटक के बीच अपने लिए फायदे का सौदा कैसे निकाले?