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कंज्यूमर अड्डा: इंटरनेट में भेदभाव का रास्ता बंद

प्रकाशित Fri, 13, 2018 पर 08:42  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

भारत में अब कोई भी इंटरनेट कंपनी आपके साथ कंटेट और स्पीड के मामले में भेदभाव नहीं कर पाएगी क्योंकि अब हमारे पास हैं दुनिया के सबसे मजबूत नेट न्यूट्रलिटी नियम। नेट न्यूट्रिलिटी पर भारत ने दुनिया में सबसे कठोर नियम बनाए हैं।


टेलीकॉम रेगुलेटर ट्राई ने पिछले साल नवंबर में इसकी सिफारिश की थी और अब टेलीकॉम कमीशन ने उसे मंजूरी दे दी है। जबकि अमेरिका भी अभी इसपर सिर्फ सोच-विचार कर रहा है। लेकिन सवाल है कि नेट न्यूट्रिलिटी है क्या चीज। और इससे हमें क्या फायदा होने वाला है। कंज्यूमर अड्डा में इसी पर चर्चा करेंगे।


मोटे तौर पर ये समझ लीजिए कि अब भारत में कोई भी इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर या इंटरनेट कंटेट कंपनी नेट की स्पीड के मामले में यूजर्स से भेदभाव नहीं कर पाएगी। मतलब अब ये नहीं होगा कि फेसबुक पर किसी को ज्यादा स्पीड मिलेगी या ज्यादा कंटेंट मिलेगा और आपको नहीं। लेकिन क्या ये पहले से नहीं था और इसे इंटरनेट पर हमारी आजादी और हमारे हक की इतनी बड़ी जीत क्यों माना जाए। इसी पर बात करेंगे।


अब नेट न्यूट्रलिटी नियम तोड़ने वाले पर जुर्माना लगेगा। हालांकि कुछ अपवादों पर ये नियम लागू नहीं होंगे। जैसे ये नियम इंटरनेट ऑफ थिंग्स, स्पेशलाइज्ड सर्विस, ऑटोनोमस कार, रिमोट सर्जरी पर नहीं लागू होगा।


क्या है नेट न्यूट्रलिटी आइए समझते हैं। इसके तहत इंटरनेट पर भेदभाव करने पर रोक लगेगी। सबको एक जैसा डाटा स्पीड, कंटेट मिलेगा। किसी खीस वेबसाइट, कंटेट को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। किसी वेबसाइट, कंटेट पर रोक नहीं होगी। किसी भी नेटवर्क पर सारे साइट मिलेंगे और हर कंटेट के लिए एक समान डाटा स्पीड मिलेगा।


भारत में इसकी जरूरत क्यों पड़ी? इस पर नजर डालें तो 2016 में एयरटेल जीरो से इस पर विवाद उठा। एयरटेल जीरो ने कुछ ऐप फ्री दिए थे। इसके सलिए ऐप कंपनियों से एयरटेल पैसा वसूलती। ट्राई ने ने एयरटेल जीरो पर रोक लगा दी। फिर उसके बाद 2016 में ही फेसबुक का फ्री बेसिक्स आया जिसमें ऑपरेटर से मिलकर डाटा पर सब्सिडी दी जानी थी। फ्री बेसिक्स में कुछ वेबसाइट फ्री दिए गए थे। ट्राई ने फ्री बेसिक्स पर भी रोक लगा दी थी।