कंज्यूमर अड्डा: अभिव्यक्ति की आजादी पर पहरा क्यों! -
Moneycontrol » समाचार » बाज़ार खबरें

कंज्यूमर अड्डा: अभिव्यक्ति की आजादी पर पहरा क्यों!

प्रकाशित Wed, 08, 2018 पर 08:04  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सोशल मीडिया पर जानलेवा अफवाहें फैलाई जा रही हैं, सुसाइड करवाने वाले गेम्स पैदा हो रहे हैं, बिना सिर-पैर की खबरें परोसी जा रही हैं, सांप्रदायिक और देश विरोधी जहर फैलाया जा रहा है, यहां तक कि चुनावों को भी प्रभावित किया जा रहा है। ऐसे में लोग सरकार से ठोस उपाय करने की उम्मीद करते हैं। लेकिन सरकार जब भी सोशल मीडिया पर नजरें टेढ़ी करती है, अभिव्यक्ति की आजादी का सवाल उठा दिया जाता है।


पहले सोशल मीडिया हब बनाकर मॉनिटरिंग और कंट्रोल की बात हुई तो सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे निगरानी और लोगों की जिंदगी में दखलअंदाजी बताया और ये योजना खटाई में चली गई। अब सरकार फेसबुक, ट्विटर, इंस्टा और टेलीग्राम जैसे ऐप्स पर कंट्रोल करने के उपाय खोज रही है। लेकिन आलोचक कहते हैं कि सरकार अपनी जिम्मेदारी से बचना चाहती है और सारा दोष सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स के सिर मढ़ देना चाहती है।


कुल मिलाकर ये एक उलझा हुआ मामला नजर आता है। साफ है कि इसमें सबकी जिम्मेदारी बनती है। लेकिन इन जिम्मेदारियों और अधिकारों की सीमा क्या है और सरकार कैसे ये लकीरें खींच सकती है, कंज्यूमर अड्डा में इन्ही सवालों पर बात हो रही है।