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कंज्यूमर अड्डा: ट्रांसफर चार्ज की वसूली गलत

प्रकाशित Tue, 04, 2018 पर 07:36  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

घर नया हो या पुराना खरीद-बिक्री पर कई तरह के चार्ज लगते हैं कुछ सरकार को जाते हैं और कुछ चार्ज बिल्डर और हाउसिंग सोसायटी भी वसूल करते हैं। इनमें कुछ तो कानूनी हैं जैसे कि स्टांप ड्यूटी। लेकिन कुछ चार्ज ऐसे भी हैं जो इस बात पर निर्भर करते हैं कि सौदे में किसका जोर ज्यादा है। ऐसी ही एक वसूली है ट्रांसफर चार्ज। जब आप अपना पुराना घर किसी को बेचते हैं तो आपकी हाउसिंग सोसायटी नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट देने से पहले ये चार्ज वसूलती है। कई सोसायटीज तो लाखों रुपये वसूल लेती हैं। ये लाखों की वसूली गलत है, इस पर जागरूकता जरूरी है।


पुराना घर खरीद-बेचने पर को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट के बदले ट्रांसफर फीस मांगती हैं, वो भी लाखों में लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है प्रॉपर्टी ट्रांसफर फीस के नाम पर वॉलेंटरी कॉन्ट्रिब्यूशन बताकर लाखों की वसूली गैरकानूनी है। कोर्ट का ये फैसला पुणे के एक 13 साल पुराने मामले में आया है। पुणे की अलंकार सहकारी को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी ने फ्लैट बेच रहे एक मेंबर से वालिटंरी डोनेशन के नाम पर 5 लाख रुपये वसूले। मेंबर ने को-ऑपरेटिव कोर्ट में फरियाद लगाई तो फैसला उसी के पक्ष में आया।


बिल्डिंग की सोसायटी ने ऊपरी अदालतों का रुख किया और होते-होते मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा और कोर्ट ने सोसायटी को 4.75 लाख रुपये 8 फीसदी ब्याज के साथ लौटाने को कहा। कोर्ट ने ये भी कहा है कि वॉलेंटरी यानि स्वेच्छा से दिया गया योगदान 25 हजार रुपये से ज्यादा नहीं हो सकता। सोसायटी स्वैच्छिक योगदान के नाम पर मुनाफा नहीं कमा सकती। मगर सवाल उठता है कि कोर्ट के इस फैसले से क्या हाउसिंग सोसायटीज कोई सबक लेंगी? ऐसी ही हालात का सामना करने वाले घर खरीदने या बेचने वाले लोग आखिर कहां जाएं? इसी मुद्दे पर आधारित है कंज्यूमर अड्डा।