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कंज्यूमर अड्डा: एचयूएफ से टैक्स चोरी या टैक्स की बचत!

प्रकाशित Wed, 05, 2018 पर 08:03  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

एचयूएफ यानि हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली संयुक्त परिवार की भारतीय परंपरा को ध्यान में रखकर अंग्रेजों ने लगभग सौ साल पहले इसे मान्यता दी। मकसद ये था कि संयुक्त परिवार के सदस्यों की निजी और पारिवारिक आय में अंतर किया जा सके और दोनों आय पर अलग-अलग टैक्स लिया जा सके। लेकिन अलग-अलग टैक्स वसूलने के साथ-साथ, अलग-अलग छूट भी देनी पड़ी। धीरे-धीरे संयुक्त परिवारों का चलन कम होता गया और एचयूएफ टैक्स बचाने का एक जरिया बनकर रह गया। अब विधि आयोग कह रहा है कि एचयूएफ के चलते सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है इसलिए क्यों ना इसे खत्म कर दिया जाए। फैसला सरकार को करना है लेकिन इससे पहले इस पर चर्चा तो बनती है।


अंग्रेजों के जमाने से चला आ रहा एचयूएफ आज कल सुर्खियों में हैं लॉ कमीशन ने सिफारिश की है कि हिंदू संयुक्त परिवारों को दी गई एचयूएफ की सुविधा को बंद कर देना चाहिए क्योंकि ये टैक्स चोरी का एक बड़ा जरिया बन रहा है। ऐसी सिफारिश क्यों की गई ये जानने से पहले जान लेते है कि एचयूएफ है क्या?


एचयूएफ यानि हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली टैक्सपेयर की एक खास कैटेगरी है। हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध धर्म मानने वालों का परिवार ज्वाइंट फैमिली बिजनेस के रूप में एचयूएफ बना सकता है। एचयूएफ से व्यक्तिगत टैक्सपेयर की तरह टैक्स लिया जाता है और छूट भी मिलती है। एचयूएफ बनाने पर व्यक्ति के कृषि आय, किराया और पुश्तैनी जायदाद की बिक्री से मिली रकम जैसे अन्य आय के स्रोतों को एचयूएफ को ट्रांसफर किया जा सकता हैं और बतौर एचयूएफ उस पर टैक्स छूट मिल जाती है। इस तरह अगर कोई टैक्सपेयर एचयूएफ का हिस्सा है तो उसे दोहरी टैक्स छूट मिलती है। इसके अलावा एचयूएफ अपने सदस्यों के लिए इंश्योरेंस पॉलिसी ले सकता है, सदस्यों को सैलरी दे सकता है जिसे एचयूएफ की आय से घटाया जा सकता है। एचयूएफ इंवेस्टमेंट भी कर सकता है।


लॉ कमीशन के मुताबिक इससे काफी टैक्स चोरी हो रही है। साथ ही लॉ कमीशन का मानना है कि धर्म के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। आपको बता दें कि केवल हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध धर्म के लोग ही एचयूएफ बना सकते हैं जबकि मुस्लिम, ईसाई और पारसी लोगों को ये सुविधा नहीं है। कुछ लोग इसे यूनिफॉर्म सिविल कोड से भी जोड़कर देख रहे हैं और गेंद अब केंद्र सरकार के पाले में है।