Moneycontrol » समाचार » बाज़ार खबरें

कंज्यूमर अड्डा: इलाज के नाम पर लूट की छूट क्यों!

प्रकाशित Fri, 07, 2018 पर 07:55  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

दिल्ली-एनसीआर के प्राइवेट अस्पतालों में मुनाफाखोरी की जांच होगी। जी हां, इलाज के तौर-तरीकों की नहीं, बल्कि मुनाफाखोरी की। तो ये साफ-साफ समझ लीजिए कि प्राइवेट सेक्टर में हेल्थ का मतलब है मुनाफा और मुनाफा तो जितना आ जाए, उतना कम। एक सिरिंज 13 रुपये में खरीदकर 106 रुपये में मरीज को देना ये मुनाफा है या मुनाफाखोरी? यही मुनाफा आपको अस्पताल में कैद करके आपकी जेब खाली करवा देता है और यही मुनाफा अच्छे डॉक्टरों, अच्छी मशीनों, दवाओं सबको अपना गुलाम बना रहा है। ऐसे में हम और आप चुप कैसे बैठ सकते हैं। आइये उस बात को आगे बढ़ाएं, जो शुरू हुई है देश की राजधानी दिल्ली से।


कंपिटिशन कमिशन ऑफ इंडिया दिल्ली-एनसीआर के बड़े निजी अस्पतालों में मुनाफाखोरी की जांच करेगा। दरअसल सीसीआई ने दिल्ली के मैक्स हॉस्पिटल में ओवरचार्जिंग के मामले का दायरा बढ़ाते हुए दिल्ली के सभी निजी सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों को इसमें शामिल कर लिया है। सीसीआई ने डायरेक्टर जनरल इंवेस्टिगेशन को आदेश दिए हैं कि दिल्ली एनसीआर के सभी निजी सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में इलाज के नाम पर हो रही मुनाफाखोरी की जांच करे। 2015 में दिल्ली के मैक्स हॉस्पिटल, पटपड़गंज में ओवरचार्जिंग का मामला सामने आया था। सीसीआई की जांच में पता चला कि अस्पताल ने मरीज के साथ कैदी जैसा व्यवहार करते हुए उसे अपनी फार्मेसी से सामान खरीदने को मजबूर किया और सिरिंज जैसे उपकरण पर 570 फीसदी तक मुनाफा वसूला। लेकिन ये कोई अकेला मामला नहीं है।


इसी साल फरवरी में आई नेशनल फर्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली-एनसीआर के निजी अस्पताल दवाओं, उपकरण और इलाज के नाम मरीजों को लूट रहे हैं। हालत ये है कि कुछ निजी अस्पताल 1,737 फीसदी तक मुनाफा वसूलते हैं। एनपीपीए की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अस्पताल कैथेटर, कैनुला और सिरिंज जैसी चीजों पर 350 फीसदी से 1700 फीसदी से भी ज्यादा मुनाफा वसूलते हैं। बिना कीमत नियंत्रण वाली दवाओं पर 160 से 1200 फीसदी का मुनाफा वसूला जाता है। नियंत्रित कीमत वाली दवाओं पर भी अस्पताल 114 से 360 फीसदी तक भारी मुनाफा वसूलते हैं।


लेकिन सवाल है कि क्या ये जांच अपने अंजाम तक पहुंचेगी। लूट का अड्डा बने इन अस्पतालों पर कोई कार्रवाई होगी? सवाल ये भी है कि जांच सिर्फ दिल्ली के अस्पतालों की क्यों? पूरे देश के निजी अस्पतालों पर लगाम कैसे कसेगी? इन्हीं सवालों पर आधारित है कंज्यूमर अड्डा।