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कंज्यूमर अड्डा: महंगी तो नहीं पड़ रही डायटिंग!

प्रकाशित Tue, 11, 2018 पर 08:06  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

चुस्त-दुरुस्त और छरहरा बदन अब सिर्फ सेहत का नहीं, स्टाइल और स्टेटस की भी कसौटी है। मगर इसका दवाब समस्या सुलझाने के बजाए बढ़ा भी सकता है। मसलन, वजन कम करने के नाम पर सबसे पहले डायटिंग का ख्याल आता है। लेकिन कहते हैं ना कि जितने लोग उतनी सलाह, फिर डायट एक्सपर्ट और उसके ऊपर गूगल गुरू। फिर भी डायटिंग वजन घटाने की वजाए बढ़ा भी सकती है। इसकी वजह ये है कि हर आदमी के लिए डायटिंग का एक फॉर्मूला नहीं हो सकता। इसके डायटिंग को लेकर हमने कई तरह की गलतफहमियां भी पाल रखी हैं।


क्या आप भी डायटिंग करते हैं? क्या आप एटकिन डायट पर रहे हैं? क्या आपने कीटो डायट भी आजमाया है? डायटिंग करना सबके लिए फायदेमंद है? क्या डायटिंग से हम फिट रहते हैं? ये वो सवाल हैं जो आपने भी कभी-न कभी किसी एक्सपर्ट या अपने जानने वाले से पूछे होंगे, इसे बारे में गूगल किया होगा या किसी अखबार या मैग्जीन में पढ़ा होगा, एक्सपर्ट्स की इस बारे में अलग-अलग राय है लेकिन अब इस बारे में एक नया रिसर्च सामने आया है।


यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन रॉस स्कूल ऑफ बिजनेस और यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न कैलिफोर्निया की स्टडी का निष्कर्ष है कि डायटिंग करते वक्त लोग अक्सर अपनी प्लेट में खाना छोड़ देते हैं ये समझते हुए कि वो कम खाएंगे तो वजन कम होगा और फिर लोग भूख लगने पर कुछ भी उल्टा-सीधा खा लेते हैं। दरअसल वो ये सोचते हैं कि उन्होंने तो कम खाया है। थोड़ा सा कुछ और खा लेंगे तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा। इतना ही नहीं लोग इसी चक्कर में जिम भी नहीं जाते क्योंकि वो समझते हैं कि उन्होंने तो ज्यादा कैलोरी खाई ही नहीं जिसे जिम में जाकर जलाने की ज़रूरत हो।


ये डायटिंग के मामले में गलत धारणाओं का एक नमूना है। ऐसी कई बातें हैं जिनसे साबित होता है कि सिर्फ डायटिंग कर लेना ना तो वजन घटने की गारंटी है, ना सेहत की और ना सुडौल शरीर तो फिर सवाल उठता है कि डायटिंग का सही तरीका क्या है और ये कितना कारगर है? इसी मुद्दे पर आधारित है आज का कंज्यूमर अड्डा।