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कंज्यूमर अड्डा: क्यों चुपचाप सहे पीरियड का वो दर्द!

प्रकाशित Tue, 09, 2018 पर 08:02  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

कंज्यूमर अड्डा में एक ऐसे मुद्दे पर बात हो रही जिस पर ज्यादा बात नहीं की जाती। जिसके बारे में बहुत सारी लड़कियों और महिलाओं को जानकारी भी नहीं और वो उससे जूझती रहती है। जी हां मासिक धर्म, माहवारी या पीरियड्स, हर महीने तकलीफ, दर्द, परेशानी से भरे वो 5 दिन। सैनिटरी नैपकिंस के एड्स में कितने ही मासूम लगते हों लेकिन असलियत में जो होता है कई बार उसके बारे में सोचना भी भारी पड़ने लगता है। इतना भारी कि ये दर्द ही अब बन चुका है एक दिमागी बीमारी जिसका नाम है पीएमडीडी यानि प्रीमेन्सट्रुअल डिस्फोरिक डिस्ऑर्डर। ऐसी तकलीफ जो महिलाओं को निराशा और कुंठा में धकेलती है। पीरियड्स से पहले मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन मे चले जाना। यहां तक कि आत्महत्या तक का ख्याल आने लगना इसके कुछ खास लक्षण हैं तो क्या है पीएमडीडी, कितनी खतरनाक है ये बीमारी और क्या है इसका इलाज, आज इसी पर बात करेंगे।


जानी मानी छात्र नेता और जेएनयू पीएचडी की छात्रा शेहला रशीद के एक ट्वीट ने एक नई बहस छेड़ दी है। कुछ दिन पहले शहला ने ट्वीट किया कि कुछ दिन पहले से मुझे आत्महत्या करने के ख्याल आने लगे हैं। दो हफ्तों तक मैं इस दौर से गुजरती रही थी। एक रात तो मैं खुदकुशी के रास्ते तलाशने लगी और अगले दिन मुझे पीरियड्स हो गए। तब मैने पीएमएस और खुदकुशी को मिलाकर देखा और पीएमडीडी के बारे में जाना। लेकिन शेहला को आखिर खुदकुशी का ख्याल क्यों आया। इसको जानने के लिए आपको पीएमडीडी के बारे में जानना होगा।


पीएमडीडी यानि प्रीमेन्सट्रुअल डिस्फोरिक डिसॉर्डर में पीरियड्स से पहले बेचैनी, गुस्सा, डिप्रेशन, झुंझलाहट कई बार खुद या किसी और के साथ कुछ बुरा करने का ख्याल आता है। अमेरिकी साइकाइट्रिक एसोसिएशन ने इसे मानसिक स्वास्थ्य विकार माना है। पीएमडीडी की वजह सेराटोनिन के स्तर में कमी को माना जाता है। बता दें कि सेराटोनिन मूड, नींद, दर्द और ध्यान को नियंत्रित करता है। राजस्थान हाईकोर्ट ने भी पीएमडीडी को मानसिक बीमारी माना है। पीएमडीडी की वजह बहुत स्पष्ट नहीं है, लेकिन अध्ययन बताते हैं कि पीएमडीडी सेराटोनिन के स्तर में कमी के कारण होता है। सेराटोनिन वह रसायन है, जो मूड यानी मनोवस्था, नींद, दर्द और ध्यान को नियंत्रित करता है। कुछ दिन पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने इसी बीमारी के आधार पर हत्या की आरोपी महिला को बरी किया है।


भारत में फिलहाल इस मुद्दे पर कोई सटीक आंकड़ा नहीं है कि कितनी महिलाओं को इस समस्या से जूझना पड़ा है, लेकिन जाने माने ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म 1 एमजी ने इसपर एक सर्वे किया जिसमें करीब 400 महिलाओं ने हिस्सा लिया। हैरानी नहीं कि 86 फीसदी महिलाओं को मालूम ही नहीं कि पीएमडीडी क्या है।


जानकारी के अभाव और समाजिक दबाव के चलते ज्यादातर महिलाएं पीरिएड्स की तकलीफों की चर्चा नहीं कर पातीं। ऐसे में पीएमडीडी की पहचान और इलाज एक बड़ी चुनौती है। अगर आप भी इसी तरह की समस्या से जूझ रही हैं तो चुप्पी तोड़िए अपने आस-पास किसी लड़की या औरत में ऐसे लक्षण दिखें तो बात कीजिए हल ढूंढिए वरना ये पीड़ा मरीज को गंभीर अवस्था में पहुंचा सकती है।