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कंज्यूमर अड्डा: वित्तीय तौर पर कितने जागरूक हैं आप!

प्रकाशित Sat, 13, 2018 पर 13:02  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

क्या आप भी ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करने के लिए किसी दूसरे की मदद मांगते हैं या पेटीएम जैसे एप से पेमेंट करने में हिचकते हैं या फिर आपको लगता है कि अगर कैशलेस ट्रांजैक्शन किया तो आप ऑलाइन फ्रॉड के शिकार हो जाएंगे! ये सवाल इसलिए क्योंकि देश की तरीब 1 तिहाई आबादी कुछ ऐसा ही सोचती है। उनके मुताबिक अगर उन्होने ऑनलाइन ट्रांजैक्शन किया तो उनका पिन या पासवर्ड चोरी हो सकता है। लेकिन क्या ये डर सही है या ये भ्रम है जिसका टूटना जरूरी है। हम सब जानते हैं कि कैशलेस इकोनॉमी के कई कई फायदे हैं। इससे ना केवल बैंकों में लंबी लाइनों में लगने से लेकर पैसों की छीना-झपटी या लूट जैसी चीजों से छुटकारा मिलता है बल्कि घंटों का काम मिनटों में हो जाता है। लेकिन यहां भी कुछ नियम हैं जिनका पालन सुरक्षित लेन-देन के लिए जरूरी है तो यहां कंज्यूमर अड्डा में इसी पर बात करेंगे कि कैसे बैंक खाता होने के साथ-साथ दूसरी चीजें भी आनी जरूरी हैं।


देश में भले ही तेजी से भागती हुई अर्थव्यवस्था हो लेकिन बैंक के काम काज को लेकर जागरूकता में देश अभी भी फिसड्डी है। सीडीएफआई का सर्वे बताता है कि देश में एक बड़ी आबादी है जिसके पास बैंक खाते तो हैं लेकिन वो कार्ड पेमेंट या नेट बैंकिंग जैसे कैशेलेस ट्रांजैक्शन से दूर भागती है। सेंटर फॉर डिजिटल फाइनेंसियल इनक्लूजन के सर्वे की माने तो 76 फीसदी लोग आज भी कैशलेस तरीकों को अपनाने से घबराते हैं। वजह ये कि उन्हें ओटीपी और पासवर्ड जैसी संवेदशनशील जानकारी चोरी होने का डर रहता है। उन्हें डेबिट और क्रेडिट कार्ड का सही इस्तेमाल करना नहीं आता हैं और मोबाइल या कम्प्यूटर के जरिए ट्रांजेक्शन करते समय अक्सर गलतियां करते बैठते हैं।


ऐेसे लोगों को नहीं पता कि पिन या डेबिट कार्ड खोने की स्थिति में क्या करना है और इससे कहीं आगे जाकर ऐसे लोगों को कैशलेश लेन-देन करने में शर्मिंदगी तक महसूस होती है। इतना ही नहीं 26 फीसदी बैंक के कर्जदारों में वित्तीय समझ का घोर अभाव है। वो नहीं जानते कि उन्होंने जो लोन लिया है उसके नियम और शर्तें क्या हैं? ये हालात तब हैं जब भारत में करीब 150 करोड़ बचत खाते और 85 करोड़ डेबिट कार्ड मौजूद है। सवाल ये कि क्या वाकई कैशेलेस लेनेदेन करना इतना असुरक्षित है या ये वो भ्रम है जिसके टूटे बिना कैशेलेस इकोनॉमी का सपना पूरा नहीं हो सकता।


जानकारों की सलाह है कि ऑनलाइन फ्रॉड से बचने के लिए सुरक्षित नेटवर्क से ही अकाउंट एक्सेस करें। साइबर कैफे से ऑनलाइन ट्रांजेक्शन न करें। फ्री वाई-फाई से इंटरनेट बैंकिंग न करें। पता या फोन नंबर बदलें तो बैंक को तुरंत जानकारी दें। बैंक डीटेल्स किसी से शेयर न करें। व्यक्तिगत जानकारी किसी के साथ साझा न करें। वेबसाइट पर पर्सनल जानकारी न डालें। मुश्किल पासवर्ड रखें इसे हर महीने बदल दें। लेनदेन के लिए कठिन पासवर्ड जरूरी हैं इसके लिए नंबर, अल्फाबेट और सिंबल मिलाकर पासवर्ड बनाएं। किसी भी साइट पर कार्ड की डीटेल सेव न करें।