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हवा में घुला जहर, कैसे दूर करें प्रदूषण का कहर

प्रकाशित Sat, 10, 2018 पर 13:24  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

पंछी, नदियां और पवन के झोंके इन्हें सरहद नहीं रोक सकती फिर भी न जाने क्यों ये बात हमारी समझ में नहीं आती कि प्रदूषण हम सबकी साझा समस्या है। दिवाली गुजर गई और इसी के साथ पटाखे या प्रदूषण के बीच किसी एक को चुनने का सवाल भी कल की बात हो चुका है। लेकिन प्रदूषण का सवाल तो अब खड़ा है। सिर्फ दिल्ली नहीं, पूरे देश के सामने खड़ा है। दुनिया के सबसे प्रदूषित 9 शहर हमारे देश में हैं। प्रदूषण मासूम बच्चों की जान ले रहा है। आखिर कब तक हम ब्लेम गेम में अपना मुंह छिपाते रहेंगे।


दिल्ली की दिवाली पर इस बार प्रदूषण का पहरा रहा फिर भी दिवाली ने प्रदूषण को बेहद गंभीर स्थिति में पहुंचा दिया। हवा की क्वालिटी खतरनाक कैटेगरी में पहुंच गई। 9 नवंबर को आनंद विहार में एयर क्वॉलिटी इंडेक्स 585, अमेरिकी दूतावास के पास 467 और आरके पुरम में 343 रिकॉर्ड किया गया। पिछले साल की बुरी हालत को देखते हुए इस बार सुप्रीम कोर्ट ने पटाखे फोड़ने को लेकर सख्त दिशानिर्देश जारी किए थे। बावजूद इसके राजधानी दिल्ली में जमकर पटाखे फोड़े गए और हवा की क्वालिटी खराब हुई। इससे दिल्ली के अलावा हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में भी वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ गया।


पिछले कुछ सालों से राजधानी दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में अक्टूबर की शुरुआत से लेकर दिसंबर तक स्मॉग का आतंक बना रहता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट में दुनिया के 20 सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों की लिस्ट में भारत के 14 शहरों को रखा गया है। डब्लूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के 90 फीसदी से भी ज्यादा बच्चे जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं। 2016 में 15 साल से कम उम्र के करीब 6 लाख बच्चों को वायु प्रदूषण के चलते जान गंवानी पड़ी। इसमें सबसे ज्यादा बच्चे भारत के थे। रिपोर्ट के मुताबिक यहां 5 साल से कम उम्र के हर 10 में से 1 बच्चे की मौत का कारण वायु प्रदूषण होता है। जाहिर है दम निकालने वाली इस हवा से बचने का तरीका हमें खुद निकालना है लेकिन सवाल बड़ा है कि आखिर क्या है इस पॉल्यूशन का सॉल्यूशन? इसी सवाल पर आधारित है आज का कंज्यूमर अड्डा।