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कंज्यूमर अड्डा: गूगल पर मत बनिए खुद के डॉक्टर

प्रकाशित Sat, 24, 2018 पर 17:36  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

क्या आप हल्का सा बुखार होने पर गूगल पर सर्च कर दवाई खाते हैं, कहीं ऐसा तो नहीं कि आपको हल्का सा सिर दर्द या सर्दी-खांसी हुई आपने गूगल पर सर्च किया और वहीं से पता करके दवाई खा ली या फिर डॉक्टर के पास बीमारी के बारे में सर्च करके गए और डॉक्टर ने उन चीजों के बारे में पूछा ही नहीं जो आपने पढ़ा है तो परेशान हो गए अगर हां तो संभल जाइए। हर छोटे-मोटे मर्ज के लिए डॉक्टर गूगल गुरु पर सर्च करना आपको भारी पड़ सकता है। हो सकता है कि ठीक होने की बजाए आप और बीमार हो जाएं। तो क्या आपको मर्ज का इलाज ऑनलाइन ढूंढना चाहिए या फिर चुपचाप डॉक्टर के पास जाने में ही भलाई है। कंज्यूमर अड्डा में इसी पर हो रही है बड़ी चर्चा।


हल्का सा बुखार, सिर दर्द या सर्दी-खांसी हुई नहीं कि लगे गूगल पर इलाज ढूंढने। ये काम करते हैं तो जरा संभलकर। क्योंकि आपकी ये आदत कभी भी भारी पड़ सकती है। गूगल के डाटा के मुताबिक ब्रिटेन में 2015 से 2018 के बीच सीने में दर्द के बारे में सर्च लगभग 8700 फीसदी बढ़ गया है जबकि पेट दर्द और पैरों में दर्द को लेकर साल में औसतन 1 से 1.5 लाख बार सर्च किया गया है। इसके अलावा छठा सबसे ज्यादा सर्च किया जाने वाला लक्षण पीठ दर्द था। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक बीते 10 सालों में ये चलन काफी तेजी से बढ़ा है और प्यू रिसर्च 2013 में इसे दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रही बीमारी बताया गया हैI


लेकिन सवाल ये है कि क्या वाकई बीमार होने पर या उसके कोई लक्षण दिखने पर हमें डॉक्टर गूगल की शरण में जाना चाहिए? जानकारों के मुताबिक ये कोई आम आदत नहीं है बल्कि साइबरकॉन्ड्रिया नाम की एक मनोवैज्ञानिक बीमारी है जो दुनिया में डायबिटीज से भी ज्यादा तेजी से बढ़ रही हैI ये नाम हाइपरकॉन्ड्रिया से प्रेरित होकर दिया गया हैI जिसमें व्यक्ति को हमेशा इस बात का शक होता है कि उसे कोई गंभीर बीमारी है। न्यूयॉर्क स्टेट साईकिएट्री इंस्टीट्यूट की रिसर्च के मुताबिक करीब 90 फीसदी अमेरिकी इसकी चपेट में हैं और भारत में भी ये तेजी से पैर पसार रही हैI


समझने वाली बात ये है कि गूगल कभी सवालों के जवाब नहीं देता हैI बल्कि आपके सवाल से जुड़े वेब पेज या पोर्टल तक आपको ले जाता हैI जाहिर है अगर कोई गूगल से ही डॉक्टर बन जाएगा, तो डॉक्टरों को इतनी मेहनत से पढ़ाई करने की क्या जरूरत पड़तीI