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कंज्यूमर अड्डा: खतरनाक खिलौनों से बच के!

प्रकाशित Sat, 08, 2018 पर 13:31  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

बच्चों का हंसना खेलना किसे पसंद नहीं लेकिन आप ये जानकर चौंक जाएंगे कि बच्चे जिन खिलौनों के साथ खेलते हैं वही उन्हें बीमार कर सकते हैं। हाल ही में हुए एक रिसर्च में ये बात निकल कर सामने आई है कि प्लासिटक से बने खिलौनों में मिलने वाला खतरनाक केमिकल काफी खतरनाक हैं। तो फिर क्या करें बच्चों को इस खतरे से कैसे बचाएं, आपका बच्चा अगर जिद करता है तो उसके कौन सा खिलौना दें और कौन सा नहीं, आज कंज्यूमर अड्डा में इसी मुद्दे पर हो रही है बड़ी चर्चा।


खिलौनों से खेलते, हंसते-खिलखिलाते बच्चे दुनिया में सबसे अनमोल नजारा हैI लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिना जाने-समझे बच्चों को खिलौने देना उनके लिए कितने खतरनाक हो सकते हैं। टॉक्सिक लिंक और आईपेन के साझा रिसर्च के मुताबिक असुरक्षित खिलौनों से बच्चों को बीमारी हो सकती है, उनका शारीरिक विकास भी कम हो सकता है। रि-साइकिल प्लास्टिक से बने इन खिलौनों से बच्चों में कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है।


अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किये गए इस शोध के तहत नाइजीरिया, रूस, फ्रांस, लैटिन अमेरिका, अफ्रीका, दक्षिण एशिया, नीदरलैंड और भारत में दिल्ली से खिलौनों के नमूने लिए गए। इसके अलावा प्लास्टिक से बनी हेयर क्लिप की जांच की गईI सभी नमूने रि-साइकिल प्लास्टिक से बने थे। रिसर्च के मुताबिक रि-साइकिल प्लास्टिक से बने सभी खिलौनों में स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक डायोक्सिन रसायन बड़ी मात्रा में पाया गया। दिल्ली से लिए गए खिलौनों में इसकी मात्रा 690 यूनिट प्रतिग्राम तक मिली जो सुरक्षित मात्रा से काफी ज्यादा है। इसमें भी ब्रोमिनेटेड डायोक्सिन बहुत अधिक पाया गया जिससे बच्चे गंभीर बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं।


लेकिन सवाल है कि आखिर ये होता कैसे हैI आखिर कैसे कोई प्लासिटक का खिलौना बच्चे की सेहत से इतना बड़ा खिलवाड़ कर सकता हैI रिपोर्ट की मानें तो बच्चे खेलते वक्त इन खिलौनो को मुंह में ले लेते हैं या शरीर से रगड़ते हैं तो डायोक्सिन नाम का ये खतरनाक केमिकल उनके शरीर में चला जाता है जिसकी वजह से बच्चों का दिमागी विकास, रोग प्रतिरोधक क्षमता और थॉयरायड सिस्टम प्रभावित होने के साथ-साथ कैंसर तक हो सकता है। डायोक्सिन प्लास्टिक ई-वेस्ट को जलाने के दौरान पैदा होता है। रि-साइकिल किए गए प्लास्टिक में इसकी मात्रा निर्धारण के लिए फिलहाल देश में कोई मानक तय नहीं है। वहीं प्लास्टिक के खिलौने बनाने की फैक्ट्रियां दिल्ली-एनसीआर सहित देश-विदेश में भी जगह-जगह धड़ल्ले से चल रही हैं।


वाकई ये स्थिति दुविधा वाली हैI बच्चों के खिलौनों से दूर भी नहीं रख सकते और ऐसे खतरनाक खिलौने दे भी नहीं सकतेI जरूरत है कि सरकार और खिलौना बनाने वाली कंपनियां इस ओर ध्यान दें ताकि हमारे नौनिहालों को एक सुरक्षित बचपन मिल सके।