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कंज्यूर अड्डा: आरओ से पानी की सफाई कम, बर्बादी ज्यादा!

प्रकाशित Fri, 04, 2019 पर 08:03  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

खर्चा ज्यादा और रिटर्न कम ये निशानी होती है एक बुरे इंवेस्टमेंट की और यही गलती हम हर रोज कर रहें हैं एक ग्लास साफ पानी पाने के लिए। ज्यादातर घर में लगे आरओ प्यूरिफायर एक ग्लास साफ पानी के लिए करीब 3 से 4 ग्लास पानी बर्बाद कर देते हैं और ये आलम तब जब देश के बड़े-बड़े संस्थानों की रिपोर्ट चिल्ला चिल्लाकर कह रही है कि एक साल के अंदर यानि 2020 तक देश के 21 बड़े शहरों पर डे जीरो का खतरा मंडरा रहा है। डे जीरो यानि वो दिन जब इन 21 शहरों में रहने वाले करोडों लोग पीने के पानी के लिए तरस जाएंगें और हम बूंद- बूंद पानी बचाने की जगह हजारों लीटर पानी आरओ के जरिए गंवा रहें हैं। आरओ प्यूरिफायर 20 फीसदी साफ पानी आप तक तक पहुंचाने के लिए 80 फीसदी पानी बहा देता है और इस पानी को हम रोज अपने घर में रोज जाया कर रहें हैं। क्या इस पानी को बचाया जा सकता है और क्यों बचाना चाहिए आज इसपर करेंगें बात। लेकिन ऐसा नहीं है कि पानी की इस बरबादी पर किसी की नजर नहीं है । नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने एक एक्सपर्ट कमिटी बनाई है जिसका मकसद है आरओ से बहते पानी का कैसे सही उपयोग किया जाए।


चाहे ऊंची कीमत चुकानी पड़े, घर में पीने का पानी प्योर होना चाहिएI इस सोच के साथ हम सब बिना सोचे समझे अपने घरों में आरओ वॉटर प्यूरीफायर लगवा रहे हैंI फिर चाहे उसकी जरूरत हो या नहींI देशभर में आरओ के इस्तेमाल से रोजाना करोड़ों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इस पर चिंता जताई है। एनजीटी ने विशेषज्ञों की एक समिति का गठन कर पानी की बर्बादी को रोकने या कम करने के बारे में सुझाव देने को कहा है। एनजीटी ने कमेटी से पूछा है कि क्या मौजूदा आरओ तकनीक को अपग्रेड किया जा सकता है अगर, हां तो वो तकनीक क्या होगी। इसके अलावा ये भी पूछा गया है कि क्या देश के अलग-अलग हिस्सों में पानी को शुद्ध करके पीने योग्य बनाने के लिए अलग-अलग तकनीक अपनाने की जरूरत है? इस कमेटी में आईआईटी दिल्ली और एनईईआरआई के विशेषज्ञों के अलावा केंद्रीय वन एवं पर्यवारण, जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और भारतीय मानक ब्यूरो के विशेषज्ञों को शामिल किया है। कमेटी 30 अप्रैल तक अपनी रिपोर्ट देगी।


हालांकि ये मुद्दा पहले भी उठता रहा है कि क्या आरओ तकनीक से फायदा ज्यादा है या नुकसान? आरओ का पूरा नाम रिवर्स ऑस्मोसिस हैI ये पानी में से अनचाहे आयन और घुले हुए ठोस तत्व यानि टीडीएस को अलग कर देता हैI लेकिन इस प्रक्रिया मे पानी की काफी बर्बादी होती हैI जानकारों के मुताबिक 1 ग्लास साफ पानी के लिए 3 से 4 ग्लास प्रदूषित पानी निकलता हैI याचिकाकर्ता ने इसी प्रदूषित पानी पर भी सवाल उठाए हैंI उनके मुताबिक आरओ प्रणाली से बर्बाद होने वाला पानी दोबारा से जमीन के अंदर समाहित हो जाता है जिससे भूजल भी प्रदूषित हो रहा है। लोग बिना जांचे कि उन्हें आरओ प्यूरीफायर की जरूरत है या नहीं धड़ल्ले से घरों में आरओ लगवा रहे हैंI वहीं अगर बेवजह के आरओ ना हों तो 30 लाख लोगों की पानी की जरूरत पूरी हो सकती है।


कई लोग इस पानी से कपड़े धोने और सफाई के काम में इस्तेमाल की सलाह भी देते हैंI लेकिन सवाल है कि क्या ये प्रदूषित पानी का सही इस्तेमाल हैI आखिर इस समस्या का हल क्या है? और अगर ऐसे ही चलता रहा तो क्या हमें आज की सुविधा के लिए कल ज्यादा कीमत तो नहीं चुकानी पड़ेगी?