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पानी को लेकर पूरे देश में हाहाकार, क्या है निदान!

प्रकाशित Thu, 20, 2019 पर 08:39  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

पानी को लेकर पूरे देश में हाहाकार मचा है। मॉनसून में देरी से संकट और बढ़ गया है। दक्षिण में चेन्नई की हालत सबसे ज्यादा ज्यादा खराब है। यहां पानी को लेकर झगड़े हो रहे हैं। शहर में पानी की सप्लाई करीब आधी रह गई है। लोगों को नहाने-धोने के लिए पानी नहीं मिल रहा है। बच्चे स्कूल-कॉलेज नहीं जा रहे हैं, उद्योग-धंधे बंद हो रहे हैं। लेकिन ये स्थिति सिर्फ चेन्नई की नहीं है। पूरे देश में है। शहरों से ज्यादा खराब हालात गांवों में है। एक तो गांवों में पानी की सप्लाई नहीं है, दूसरे नदी-तालाब, जलाशय सूख गए हैं, लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं।


चेन्नई के जल संकट की बात करें तो शहर के चार बड़े जलाशय सूख गए हैं। पानी की सप्लाई में 40 फीसदी की कटौती की गई है। यहां रोजना 80 करोड़ लीटर पानी चाहिए लेकिन सप्लाई सिर्फ 52 करोड़ लीटर की हो रही है। गौरतलब है कि दुनिया की 16 फीसदी आबादी भारत में लेकिन दुनिया के पानी का सिर्फ 4 फीसदी हिस्सा भारत के पास है। भारत का 70 फीसदी पानी प्रदूषित है। सभी शहरों में जरूरत से कम पानी की सप्लाई होती है। चेन्नई, हैदराबाद, बंगलुरू में दिक्कत ज्यादा है। ज्यादातर छोटे शहरों में भूमिगत जल की सप्लाई होती है। भूमिगत जलस्तर में गिरावट से समस्या बढ़ी है। इंडस्ट्री, खेती के केमिकल से भूमिगत जल प्रदूषित हो गया है। गर्मी बढ़ने से ग्लेशियर भी पिघल रहे हैं।


कहां गया सारा पानी, इस पर नजर डालें तो देश में पानी को बचाने की गंभीर कोशिश नहीं हुई है। बारिश के पानी को रोकने की व्यवस्था सिर्फ कागजों पर है। चेक डैम बनाकर पानी को रोकने की कोशिश नहीं हुई है। सीवेज ट्रीटमेंट की सही व्यवस्था नहीं है जिससे नदियां प्रदूषित हुई हैं। तालाब, जलाशय, नदियां प्रदूषित होती जा रही हैं। देश में सीवेज के पानी को साफ कर इस्तेमाल करने की व्यवस्था नहीं है।


इस जल संकट से निपटने के लिए नदी, तालाब समेत सभी जल स्रोतों को बचाना होगा। बारिश के पानी को भी रोकना जरूरी है। गिरते जल स्तर से निपटने के लिए भूमिगत जल को रिचार्ज करने की व्यवस्था करनी होगी। सीवेज के पानी को साफ करके इस्तेमाल करना होगा।