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कंज्यूमर अड्डाः अपने घर, अपने हक के लिए उठाएं आवाज

प्रकाशित Thu, 06, 2018 पर 09:13  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

बाजार का सबसे पवित्र नियम है कि कंज्यूमर इज किंग, लेकिन रियल एस्टेट सेक्टर में अभी तक बिल्डर ही किंग है वो भी एक ऐसा धोखेबाज किंग जो कंज्यूमर को दर-दर की ठोकरें खाने पर मजबूर कर देता है। लेकिन अब और नहीं। हाल के दिनों में रेरा जैसे कानून और कोर्ट की सख्ती से बाजी पलट रही है - आम्रपाली, जेपी और यूनिटेक जैसे धोखेबाजी के कुख्यात मामले अब अंजाम तक पहुंचते दिख रहे हैं। ये सही वक्त है कि धोखेबाज बिल्डरों को सबक सिखाया जाए ताकि आपकी मेहनत की कमाई में कोई फ्रॉड नजर ना लगाए और घर का सपना, नाइटमेयर ना बने।


बिल्डरों से परेशान घर खरीदार, कहां तो सपना देखा था नए घर में बसने का और कहां धरना-प्रदर्शन और कोर्ट कचहरी के चक्कर, दिल्ली एनसीआर सहित देश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसी तस्वीरें आती रहती हैं। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने धोखेबाज बिल्डरों के खिलाफ लड़ाई को नए मायने दिए हैं। आम्रपाली, जेपी और यूनिटेक समेत कई उदाहरण हैं जिनमें कोर्ट ने बायर्स को हक दिलाने के लिए सख्ती दिखाई  है।  आम्रपाली के 46 हजार से भी ज्यादा घर खरीदार अधर में लटके हुए हैं।


सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीर धोखाधड़ी बताते हुए कहा है कि अगर इसमें 100 लोगों की भी भूमिका मिली, तो सब के सब अंदर जाएंगे। कोर्ट ने एनबीसीसी को प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए जरूरी फंड मुहैया करवाने की बात कही है। इसके अलावा नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रीड्रेसल कमिशन ने रीयल इस्टेट कंपनी यूनिटेक लिमिटेड को एक घर खरीदार की 40 लाख रुपये से अधिक राशि लौटाने को कहा है जबकि एक दूसरे घर खरीदार का 58 लाख रुपये ब्याज समेत लौटाने को कहा है जेपी का मामला भी इस वक्त एनसीएलटी  में चल रहा है और घर खरीदारों को उम्मीद है कि फैसला जल्द होगा।


तो अगर आपके साथ भी बिल्डर ने ऐसा ही कोई धोखा किया है तो चुप मत बैठिए अपने हक की लड़ाई जरूर लड़िए, ताकि आपको आपके सपनों का घर मिल सके।