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कोरोना और लॉकडाउन की एक्सपोर्ट पर मार, सप्लाई में दिक्कत और ऑर्डर हो रहे कैंसिल

कोरोना की मार से हैंडीक्राफ्ट और लग्जरी टेक्सटाइल के एक्सपोर्ट को बड़ा झटका लगा है।
अपडेटेड Jun 24, 2020 पर 21:19  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

कोरोना की मार से हैंडीक्राफ्ट और लग्जरी टेक्सटाइल के एक्सपोर्ट को बड़ा झटका लगा है। बैंकों के ब्याज का बोझ तो इंडस्ट्री पर बढ़ ही रहा है। खरीदारों ने अपने ऑर्डर को या तो रद्द कर दिया है या फिर होल्ड पर रख दिया है। ऐसे में आत्मनिर्भर भारत पैकेज से इनको कितनी मदद मिली है।


बारीक कारीगरी वाले हाथों से बने भारत के कालीन की दुनियाभर में खास पहचान है लेकिन कोरोना ने इस इंडस्ट्री की कमर ही तोड़ दी। सालाना करीब 25 से 40 करोड़ रुपए का कारोबार करने वाले गुरूग्राम के आकाश मित्तल अब तक सिर्फ एक कनसाइनमेंट भेज पाए। लॉकडाउन से सप्लाई की दिक्कत हुई तो कोरोना के डर से रेगुलर खरीदारों ने भी अपने 90 फीसदी ऑर्डर फिलहाल रोक दिए हैं। इस दोहरी मुसीबत में आत्मनिर्भर भारत पैकेज इमरजेंसी क्रेडिट लाइन किसी लाइफलाइन से कम नहीं है।


आम तौर पर फरवरी से मई का महीना एक्सपोर्ट के लिए पीक सीजन होता है, लेकिन इस बार ये लॉकडाउन की भेंट चढ़ गया। अब दूसरा पीक सीजन क्रिसमस के समय आएगा। लेकिन एक्सपोर्टर्स ने अभी से ही उम्मीदें छोड़ दी हैं। इतना ही नहीं एक्सपोर्ट सबवेंसन स्कीम के तहत ब्याज दरों में राहत भी जल्द ही खत्म होने वाली है।  ऐसे में कर्ज पर 3.5 फीसदी के बजाय 16 फीसदी तक ब्याज चुकाना पड़ेगा। 


एक्सपोर्टर्स की मांग है कि MSMEs को इमरजेंसी क्रेडिट लाइन के तहत मौजूदा लोन के 20 फीसदी के बजाय 40 फीसदी कर्ज मिले। इसके अलावा यूसेज पीरियड को बढ़ाकर 15 महीने कर दिया जाए।  पैकेजिंग क्रेडिट की अवधि खत्म होने के बाद बैंक बिना पेनल्टी रीपेमेंट करने का विकल्प दें। कर्ज चुकाने में असमर्थ एक्सपोर्टर के PC लोन को टर्म लोन में कन्वर्ट कर दिया जाए।





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