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Corona Impact: देश के 12% स्टार्टअप्स हुए बंद, 70% आईसीयू में

देश के करीब 12 प्रतिशत स्टार्टअप्स कोरोना का झटका सहन नहीं कर पाये और वे बंद हो गये हैं।
अपडेटेड Jul 07, 2020 पर 15:31  |  स्रोत : Moneycontrol.com

कोरोना और लॉकडाउन के झटके से कई कंपनियां धराशाई हुई हैं। कुछ उस झटके से निकलने का प्रयास कर रहे हैं। कोरोना के झटके का असर अब लॉकडाउन खुलने के साथ दिखाई देना शुरू हो गया है। देश के तेजी से बढ़ते स्टार्टअप्स इंडस्ट्री पर भी कोरोना की वजह से ब्रेक लगा है। देश के करीब 12 प्रतिशत स्टार्टअप्स कोरोना का झटका सहन नहीं कर पाये और वे बंद हो गये हैं जबकि 70 प्रतिशत स्टार्टअप्स अपनी पूरी ताकत से उसका मुकाबला कर रहे हैं परंतु उनकी स्थिति भी बहुत गंभीर बनी हुई है।


इंडस्ट्री चेंबर फिक्की व इंडियन एंजेल नेटवर्क ने भारतीय स्टार्टअप पर कोरोना का असर इस विषय पर समीक्षा की है और इसके बाद इसकी रिपोर्ट में ये बात सामने आई है। इस रिपोर्ट के अनुसार 33 प्रतिशत स्टार्टअप्स ने अपना निवेश रोकने का निर्णय लिया है। 10 प्रतिशत स्टार्टअप्स के करार पूरे हो गये हैं। इस समय केवल  22 प्रतिशत स्टार्टअप्स के पास ही अगले  3 से 6 महीनों के लिए खर्च के पैसे बचे हैं। जबकि 68 प्रतिशत स्टार्टअप्स ने खर्चों में कटौती करना शुरू कर दिया है।


लोकसत्ता में छपी खबर के मुताबिक इस रिपोर्ट में 30 प्रतिशत कंपनियों ने कहा है कि यदि लॉकडाउन अधिक बढ़ाया गया तो उन्हें कर्मचारी कटौती का निर्णय लेना पड़ सकता है। दूसरी तरफ 43 प्रतिशत स्टार्टअप्स ने अप्रैल से जून महीने के दौरान 20 से 40 प्रतिशत सैलरी कट शुरू भी कर दिया है। कंपनियों का कहना है कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए जल्द ही इस सेक्टर को आर्थिक पैकेज मिलना चाहिए।


फिक्की के महासचिव दिलीप चिनॉय ने कहा है कि फिलहाल स्टार्टअप सेक्टर धैर्य के साथ बने रहने का प्रयत्न कर रहा है। निवेश की गति धीमी है जो अगले कुछ महीनों तक धीमी ही रहने की उम्मीद है। चिनॉय ने आगे कहा कि पैसे की कमी के चलते अगले 3 से 6 महीनों में बड़े पैमाने पर इस सेक्टर में कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा सकता है।


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